ताजा खबरें | नायडू ने राज्यसभा में नियमों के अधीन और निर्बाध चर्चा कराने की अपील की

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. बजट सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू एवं नियमबद्ध ढंग से चलाने की सदस्यों से अपील करते हुए सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि ऐसी किसी भी स्थिति को टाला जाना चाहिए जिससे सदन एवं राष्ट्र के हित प्रभावित होते हों।

नयी दिल्ली, दो फरवरी बजट सत्र में राज्यसभा की कार्यवाही को सुचारू एवं नियमबद्ध ढंग से चलाने की सदस्यों से अपील करते हुए सभापति एम वेंकैया नायडू ने मंगलवार को कहा कि ऐसी किसी भी स्थिति को टाला जाना चाहिए जिससे सदन एवं राष्ट्र के हित प्रभावित होते हों।

संसद के पिछले सत्र में तीन कृषि विधेयकों के पारित होने के समय उच्च सदन में भारी हंगामे की ओर परोक्ष संकेत करते हुए नायडू ने सदस्यों से वर्तमान बजट सत्र को ‘‘अधिक अर्थवान’’ बनाने को कहा जिसमें मुद्दों पर ‘‘शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और मर्यादित तरीके से’’ व्यापक चर्चा हो सके।

उन्होंने अधिक ब्योरा नहीं देते हुए कहा, ‘‘पिछली बार कुछ दुर्भाग्यपूर्ण’’ घटनाएं हुई थीं।

सितंबर में हुए पिछले सत्र में कृषि क्षेत्र के सुधार के लिए लाये गये तीन विधेयकों को पारित किए जाने के समय विपक्ष के कुछ सदस्यों ने नियम पुस्तिका फाड़ दी थी और वे आसन के बेहद समीप आ गये थे और जमकर हंगामा किया था।

नायडू ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करना हम सभी के लिए बाध्यकारी है कि सदन समुचित ढंग से चले, सदस्य नियमों का पालन करें, अनुशासन एवं गरिमा को बरकरार रखा जाए तथा सार्थक ढंग से चर्चा में हिस्सा लिया जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैं सदैव ही सदस्यों से यह कहता रहा हूं कि ऐसी किसी भी स्थिति को टाला जाए जिससे सदन और राष्ट्र के हित प्रभावित होते हों।’’

शुक्रवार से शुरू हुए बजट सत्र में मंगलवार को पहली बार उच्च सदन में पूरे दिन के लिए कामकाज निर्धारित था। शुक्रवार को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति अभिभाषण के बाद इसकी प्रति उच्च सदन के पटल पर रखे जाने के बाद बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था। इसी प्रकार सोमवार को लोकसभा में आम बजट पेश किये जाने के बाद इसकी प्रति उच्च सदन में रखी गयी और बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया था।

नायडू ने कहा कि देश में प्रतिनिधित्व वाले लोकतंत्र के 100 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं।

केंद्रीय एवं विधायी परिषद के पहले प्रत्यक्ष चुनाव 1920 की सर्दियों में हुए थे।

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र का मतलब लोगों की उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सार्वजनिक मामलों के प्रबंधन और नीति निर्धारण में भागीदारी होता है। ’’

सभापति ने कहा, ‘‘आधुनिक प्रतिनिधित्व लोकतंत्र के 100 वर्ष पूरा होने का अवसर हमें अपने देश की विधायिका के कामकाज और लोकतंत्र की स्थिति के बारे में गहराई से चिंतन करने का अवसर देता है।’’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव और आम बजट 2021-22 पर चर्चा के लिए 20 से अधिक घंटे का आवंटित समय सदस्यों को लोक महत्व के विभिन्न मुद्दों को उठाने का पर्याप्त अवसर प्रदान करेगा, जिसका सरकार जवाब देगी। उन्होंने रविवार को विभिन्न दलों के नेताओं के साथ हुई उनकी चर्चा का भी उल्लेख किया।

नायडू ने कहा, ‘‘मैं गंभीरता से आशा करता हूं कि पिछले चार सत्रों की भावना के अनुरूप यह महत्वपूर्ण बजट सत्र भी बहुत कामकाज वाला रहेगा।’’

नायडू ने कहा कि इस महत्वपूर्ण सत्र को चलाने के बारे में सदन के सभी वर्गों की भावना को वह महसूस कर रहे हैं। इसमें राष्ट्रपति ने दोनों सदनों के सदस्यों के समक्ष सरकार के दृष्टिकोण को प्रस्तुत कर दिया है तथा सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए आम बजट पेश कर दिया जिसमें कोविड-19 से उबरने तथा स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया गया है।

संसद के दो सत्रों के बीच हुए कामकाज की चर्चा करते हुए नायडू ने कहा कि राज्यसभा की विभागों संबंधित आठ संसदीय स्थायी समितियों में निर्धारित समय से अधिक कामकाज हुआ और दो सत्रों के बीच कुल 55 बैठकें हुईं।

उन्होंने कहा कि इन बैठकों की कुल अवधि 110 घंटे और चार मिनट रही जिसकी औसत दो घंटे सात मिनट आती है। उन्होंने कहा कि यह एक घंटे 54 मिनट के पिछले औसत से काफी बेहतर है।

सभापति ने कहा कि राज्यसभा की छह समितियों ने दो सत्रों के बीच महामारी के फैलने, उसके परिणाम और प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर 38 घंटे 34 मिनट तक चर्चा की।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा की इन समितियों ने महामारी से जुड़े मुद्दों पर गलती निकालने की नीयत से नहीं बल्कि निष्पक्ष और एवं सकारात्मक ढंग से चर्चा की ताकि भविष्य में आने वाली इस प्रकार की चुनौतियों के लिए मार्गदर्शन दिया जा सके।’’

नायडू ने कहा, ‘‘इन समितियों ने सरकार, लोगों एवं सभी पक्षों को महामारी की इन चुनौतियों से निबटने के लिए आगे बढ़कर प्रयास करने के कारण बधाई दीं’’

उन्होंने पिछले साल के इसी समय और अभी के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकने की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत अब इस तरह के राष्ट्र की छवि से काफी दूर निकल आया है जिसके पास परीक्षण की सीमित सुविधाएं, गुणवत्ता वाले मास्क और वैयक्तिक सुरक्षा के कम उपाय थे। अब यह ऐसा देश बना है जिसने महामारी पर सफलतापूर्वक लगाम लगायी। साथ ही यह स्वेदशी आधार पर बनाये गये टीकों के रूप में अन्य देशों के लिए एक उम्मीद तथा विश्व के लिए टीका कारखाने के रूप में उभरा है।

सभापति ने कहा, ‘‘यह एक उल्लेखनीय बदलाव है। यह सदन इसके लिए लोगों एवं अन्य सभी संबंधित लोगों की सराहना करता है।’’

माधव मनीषा

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