जरुरी जानकारी | नई फसल की आवक बढ़ने से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मंडियों में सरसों की नई फसल की आवक बढ़ने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों तेल-तिलहन कीमत में गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा सोयाबीन तेल-तिलहन, मूंगफली तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) तथा पामोलीन तेल कीमतें भी नीचे आ गईं। दूसरी ओर, मूंगफली तेल और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

नयी दिल्ली, चार फरवरी मंडियों में सरसों की नई फसल की आवक बढ़ने के कारण देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों तेल-तिलहन कीमत में गिरावट दर्ज हुई। इसके अलावा सोयाबीन तेल-तिलहन, मूंगफली तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) तथा पामोलीन तेल कीमतें भी नीचे आ गईं। दूसरी ओर, मूंगफली तेल और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।

मलेशिया और शिकॉगो एक्सचेंज में भारी गिरावट का रुख है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि एक तरफ सरकार बजट में तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिये जाने की बात करती है, दूसरी ओर जमीनी स्थिति उलट नजर आती है। जैसे कि महाराष्ट्र में बिनौला खल का दाम 3,500-3,600 रुपये क्विंटल है जबकि वायदा कारोबार में सट्टेबाजों ने खल का दाम पिछले कुछ समय से नीचे यानी 2,700-2,800 रुपये क्विंटल चला रखा है। ऐसा संभवत: कपास का दाम तोड़कर किसानों से सस्ते में उनकी उपज हड़पने के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जो लोग वायदा कारोबार खोलने की वकालत करते हैं, उन्हें क्या यह स्थिति नजर नहीं आती। जब कपास का उत्पादन कम हुआ है तो खल का दाम कैसे नीचे चल रहा है? वायदा कारोबार में कल बिनौला खल का दाम 2,703 रुपये क्विंटल था जो आज घटकर 2,692 रुपये क्विंटल रह गया है। क्या इसे किसानों की मूल्य खोज का साधन समझना सही होगा? कम कपास उत्पादन को देखते हुए भारतीय कपास निगम (सीसीआई) को बिनौला सीड की बिक्री पर एकदम रोक लगा देनी चाहिये जिसका दाम टूटने से पूरे तेल-तिलहन बाजार की धारणा बिगड़ती है।

सूत्रों ने कहा कि इस जमीनी हकीकत को देखे और दुरुस्त किये बगैर तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाना असंभव है। इसी अनदेखी की वजह से पिछले कुछ दशकों में हुए प्रयासों का कोई नतीजा नहीं निकला है, उल्टे खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता बढ़ती चली गई है।

नई फसल की आवक बढ़ने से सरसों तेल-तिलहन में गिरावट रही। बाजार धारणा बिगड़ने के बीच मूंगफली तिलहन और सोयाबीन तेल-तिलहन में भी गिरावट रहीं। सीपीओ और पामोलीन का दाम एक बार फिर सोयाबीन से पर्याप्त यानी 700-800 रुपये क्विंटल अधिक हो चला है और इस भाव पर लिवाल नहीं हैं जिससे इन तेलों के दाम भी गिरावट के साथ बंद हुए।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 6,050-6,150 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 5,200-5,525 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 13,950 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल - 2,115-2,415 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,240-2,340 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,240-2,365 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 13,250 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 13,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,200 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 12,250 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 12,500 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,850 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,850 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,225-4,275 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 3,925-4,025 रुपये प्रति क्विंटल।

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