देश की खबरें | मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने शु्क्रवार की हिंसा में शामिल लोगों को बाहर करने की मांग की
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने रविवार को शुक्रवार की हिंसा की निंदा की और मांग की कि उसमें हिस्सा लेने वालों को इस्लाम से बाहर किया जाए क्योंकि पथराव, आगजननी और दंगा फैलाने की घटनाओं से न केवल इस धर्म की बदनामी हुई बल्कि मुसलमानों को शर्मिदंगी भी झेलनी पड़ी।
नयी दिल्ली, 12 जून राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने रविवार को शुक्रवार की हिंसा की निंदा की और मांग की कि उसमें हिस्सा लेने वालों को इस्लाम से बाहर किया जाए क्योंकि पथराव, आगजननी और दंगा फैलाने की घटनाओं से न केवल इस धर्म की बदनामी हुई बल्कि मुसलमानों को शर्मिदंगी भी झेलनी पड़ी।
एक बयान में एमआरएम ने हिंसा की इन घटनाओं को भारत में अशांति पैदा करने तथा विदेशों में उसकी छवि बदनाम करने की ‘एक साजिश’ करार दिया और मुसलमानों से शांत रहने एवं किसी के बहकावे में नहीं आने की अपील की। इस संगठन के संस्थापक आरएसएस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार हैं।
मुस्लिम मंच ने मांग की कि सभी राज्य सरकारें कानून-व्यवस्था एवं शांति बनाये रखने के लिए दंगाइयों के विरूद्ध त्वरित कार्रवाई करें। उसने तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप) समाजवादी पार्टी, शिवसेना, कांग्रेस समेत गैर भाजपा राजनीतिक पार्टियों से उन नेताओं के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की ‘‘ जो हिंदू देवी-देवताओं एवं धर्म का अपमान करते हैं।’’
एमआरएम ने कहा , ‘‘हिंसा की घटनाओं के आलोक में मंच के सभी पदाधिकारियों की आपात ऑनलाइन बैठक शनिवार को हुई। राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफजल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पथराव, आगजनी और दंगा की घटनाओं की कड़ी निंदा की गयी। ’’
बैठक में कहा गया कि शुक्रवार की हिंसा की घटनाओं ने न केवल इस्लाम को बदनाम किया बल्कि मुसलमानों को भी शर्मिदंगी महसूस हुई।
मंच ने कहा कि इस्लाम की शांतिपूर्ण धर्म के रूप में पहचान है लेकिन देश के विभिन्न हिस्सों में शुक्रवार को हुई पथराव एवं दंगे की घटनाएं संकेत देती हैं कि यह ‘शैतानों’ के हाथों में चला गया।
एमआरएम ने कहा, ‘‘ यह मंच मांग करता है कि शुक्रवार को जो लोग पथराव, आगजनी हिंसा में शामिल थे और जिन्होंने नफरत भरे भाषण दिये, उन्हें इस्लाम से बाहर किया जाए। इस मंच की सभी उलेमाओं एवं मौलवियों से इस मांग पर विचार करने की अपील है।’’
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