देश की खबरें | आरटीआई कार्यकर्ता लिंगाराजू की हत्या: उच्चतम न्यायालय ने नोटिस जारी किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमत हो गया, जिसमें सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता और ‘महा प्रचंड’ अखबार के संपादक लिंगाराजू की हत्या के सभी 12 आरोपियों को ठोस साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था।
नयी दिल्ली, 31 जुलाई उच्चतम न्यायालय कर्नाटक उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की उस याचिका पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सहमत हो गया, जिसमें सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता और ‘महा प्रचंड’ अखबार के संपादक लिंगाराजू की हत्या के सभी 12 आरोपियों को ठोस साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने मामले में बरी किए गए लोगों को नोटिस जारी किये और उनसे जवाब मांगा। राज्य की ओर से मामले में पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार और अधिवक्ता वी एन रघुपति पेश हुए।
कर्नाटक सरकार ने आरोपियों को बरी करने के उच्च न्यायालय के चार नवंबर, 2022 के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है। लिंगाराजू पर 20 नवंबर 2012 को उनके घर के पास तीन हथियारबंद लोगों ने उस समय हमला किया था जब वह एक सार्वजनिक नल से पानी भर रहे थे।
लिंगाराजू की पत्नी उमा देवी घटना के दिन अपने पति के साथ थीं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई और संदिग्ध के रूप में बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के पूर्व पार्षद गोविंदराजू का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गोविंदराजू को अपने घर पर लोकायुक्त छापे में लिंगाराजू का हाथ होने का संदेह था और वह उनके प्रति द्वेष रखते थे।
पुलिस ने 12 आरोपियों - रंगास्वामी, आर शंकर, राघवेंद्र, गोविंदराजू, गौरम्मा (गोविंदराजू की पत्नी), चंद्रा, शंकर, उमाशंकर, वेलु, लोगनाथ, जहीर और सुरेश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया।
सुनवाई पूरी होने के बाद सत्र न्यायाधीश की अदालत ने 28 अक्टूबर 2020 को आरोपियों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत अन्य आरोपों के अंतर्गत भी सजा सुनाई गई। सभी आरोपियों ने अपील में उच्च न्यायालय का रुख किया।
उच्च न्यायालय की एक पीठ ने आरोपियों द्वारा दायर चार आपराधिक अपील का निपटारा कर दिया और मामले में आरोपी सभी 12 लोगों को बरी कर दिया। ठोस सबूत के अभाव में उन्हें बरी किया गया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)