देश की खबरें | मुल्लापेरियार बांध: केरल सरकार ने तमिलनाडु को तड़के भारी मात्रा में पानी नहीं छोड़ने का निर्देश देने का अनुरोध किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह 126 साल पुराने मुल्लापेरियार बांध से तड़के भारी मात्रा में पानी नहीं छोड़ने का तमिलनाडु सरकार को निर्देश दे क्योंकि ऐसा करने से बांध के निचले क्षेत्रों (डाउनस्ट्रीम) में रहने वाले लोगों को भारी नुकसान होता है।

नयी दिल्ली, नौ दिसंबर केरल सरकार ने उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह 126 साल पुराने मुल्लापेरियार बांध से तड़के भारी मात्रा में पानी नहीं छोड़ने का तमिलनाडु सरकार को निर्देश दे क्योंकि ऐसा करने से बांध के निचले क्षेत्रों (डाउनस्ट्रीम) में रहने वाले लोगों को भारी नुकसान होता है।

उच्चतम न्यायालय में दायर एक आवेदन में केरल सरकार ने तमिलनाडु सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि वह पर्याप्त समय दिए बिना तड़के भारी मात्रा में पानी छोड़ने के बजाय दिनभर बांध से पानी छोड़कर जल स्तर को नियंत्रित करे।

न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति सी. टी. रविकुमार की पीठ केरल के इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर 1895 में बने बांध के बारे में मुद्दों को उठाने वाली याचिकाओं पर शुक्रवार को सुनवाई करने वाली है।

केरल सरकार ने अधिवक्ता जी. प्रकाश के माध्यम से दायर अपने आवेदन में कहा है कि पर्यवेक्षी समिति को शीर्ष अदालत के अंतरिम निर्देशों के अनुसार कार्य करने का निर्देश दिया जाता है ताकि निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को कठिनाइयों से बचाया जा सके।

आवेदन में कहा गया है, ‘‘पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से बिना किसी सूचना के भोर पहर बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण मुल्लापेरियार बांध के निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और उनकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।’’

इसमें कहा गया है कि केरल के मुख्यमंत्री ने पानी छोड़ने के संबंध में तत्काल कार्रवाई करने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा था। आवेदन में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने 28 अक्टूबर को आदेश दिया था कि फिलहाल विशेषज्ञ समिति द्वारा अधिसूचित जल स्तर का सभी पक्ष पालन करेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने 22 नवंबर को कहा था कि बांध से जुड़े सभी मुद्दों पर 10 दिसंबर को सुनवाई होगी।

तमिलनाडु सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा था कि मुल्लापेरियार बांध को बंद करने के लिए केरल सरकार का ‘‘बार-बार किये जाने वाला दावा’’ ‘‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’’ है क्योंकि बांध को जलविज्ञान (हाइड्रोलॉजिकल), संरचनात्मक और भूकंपीय रूप से सुरक्षित पाया गया है।

मुल्लापेरियार बांध मामले पर केरल सरकार के एक हलफनामे के जवाब में, तमिलनाडु राज्य ने उच्चतम न्यायालय को बताया था कि बांध को जल विज्ञान संबंधी नजरिये, संरचनात्मक और भूकंपीय रूप से सुरक्षित पाया गया है।

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