देश की खबरें | पेशाब की घटना, आदिवासी ‘अत्याचार’ पर कांग्रेस के हंगामे के बीच मप्र विधानसभा दिन भर के लिए स्थगित
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्य प्रदेश विधानसभा में सीधी में पेशाब घटना और आदिवासियों पर "अत्याचार" के विषय पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस के हंगामे के बाद मंगलवार को सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
भोपाल, 11 जुलाई मध्य प्रदेश विधानसभा में सीधी में पेशाब घटना और आदिवासियों पर "अत्याचार" के विषय पर स्थगन प्रस्ताव के जरिए चर्चा कराने की मांग को लेकर कांग्रेस के हंगामे के बाद मंगलवार को सदन की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।
गत चार जुलाई, मंगलवार को एक वीडियो सामने आया जिसमें प्रवेश शुक्ला नामक व्यक्ति मध्यप्रदेश के सीधी जिले में एक आदिवासी व्यक्ति पर पेशाब करते हुए दिखाई दिया। अगले दिन पांच जुलाई को शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया और उसके खिलाफ सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए), एससी/एसटी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। इस घटना को लेकर व्यापक स्तर पर आक्रोश फैल गया।
आज जैसे ही विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हुआ, कांग्रेस सदस्य कांतिलाल भूरिया ने पेशाब करने की घटना को उठाया, लेकिन अध्यक्ष गिरीश गौतम ने उन्हें पारंपरिक वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत बजने तक इंतजार करने को कहा।
बाद में, कांग्रेस के विधायकों ने पेशाब का मुद्दा फिर से उठाया लेकिन अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस को विधायी परंपरा की याद दिलाई कि सदन सत्र की पहली बैठक के दौरान दिवंगत नेताओं और बड़ी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देता है।
सदन ने पूर्व मंत्री मधुकर हरणे, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व मुख्य सचिव निर्मला बुच और इंदौर मंदिर की स्लैब ढहने, खरगोन बस दुर्घटना और बालासोर ट्रिपल-ट्रेन दुर्घटना में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी।
सदस्यों द्वारा श्रद्धांजलि देने के बाद अध्यक्ष ने दिवंगत आत्माओं के सम्मान में कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह ने पेशाब करने की घटना पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पेशाब करने की घटना दो करोड़ आदिवासियों की आबादी वाले मध्य प्रदेश पर कलंक है। उन्होंने केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि आदिवासियों पर अत्याचार के मामले में मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर है।
नरोत्तम मिश्रा ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने पहले ही मामला (सीधी घटना पर चर्चा की मांग) सदन के समक्ष रख दिया है और सभापति के फैसले का इंतजार है। लेकिन कमलनाथ ने अपना भाषण जारी रखा।
वरिष्ठ कांग्रेस विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने मिश्रा के हस्तक्षेप पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस मामले को उठाने की अनुमति कार्यमंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक के दौरान दी गई थी।
मिश्रा ने कहा कि ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई है और मामला विधानसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है। उनके इस बयान से विपक्षी दलों में हंगामा मच गया।
अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि बीएसी में सीधी चर्चा मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
इसके बाद कांग्रेस विधायक आसंदी के सामने गए और सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। हंगामे के बीच अध्यक्ष गिरीश गौतम ने विधानसभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तो कांग्रेस सदस्य फिर से आसनके सामने जमा हो गए और आदिवासी समुदाय पर "अत्याचार" के खिलाफ नारे लगाने लगे।
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