विदेश की खबरें | नेपाल में राजतंत्र समर्थकों की सुरक्षा बलों के साथ झड़प
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. नेपाल के दिवंगत राजा पृथ्वी नारायण शाह की 299वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार को राजतंत्र समर्थक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में केंद्रीय प्रशासनिक सचिवालय सिंह दरबार की ओर मार्च किया और इस दौरान उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई।
काठमांडू, 11 जनवरी नेपाल के दिवंगत राजा पृथ्वी नारायण शाह की 299वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार को राजतंत्र समर्थक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में केंद्रीय प्रशासनिक सचिवालय सिंह दरबार की ओर मार्च किया और इस दौरान उनकी सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई।
‘काठमांडू पोस्ट’ की खबर के अनुसार राजतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारी जब सिंह दरबार के सामने लगी दिवंगत राजा की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के लिए आगे बढ़ रहे थे, तब दंगा निरोधक पुलिस ने उन्हें रोका क्योंकि यह एक प्रतिबंधित क्षेत्र है। इससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई।
समाचारपत्र के अनुसार इस झड़प में कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं।
देश का झंडा और पृथ्वी नारायण शाह के चित्र लिये हुए प्रदर्शनकारियों ने एक हिंदू राष्ट्र और राजतंत्र की स्थापना की मांग की।
नेपाल को 2006 के एक जन आंदोलन की सफलता के बाद 2008 में एक धर्मनिरपेक्ष देश घोषित कर दिया गया था और 240 वर्ष पुराना राजतंत्र समाप्त हो गया था।
इस बीच, प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने दिवंगत राजा को श्रद्धांजलि दी और आधुनिक नेपाल में उनके विशेष योगदान को याद किया।
ओली ने ट्वीट किया, ‘‘नेपाल के एकीकरण में राजा पृथ्वी नारायण शाह ने जो योगदान दिया है, उसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती। आज, उनकी 299वीं जयंती के अवसर पर, मैं उनके विशेष योगदान को याद करता हूं और उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।’’
पृथ्वी नारायण शाह गोरखा के राजा थे जब उन्होंने 1745 में राष्ट्रीय एकीकरण अभियान शुरू किया था। उन्हें नेपाल के एकीकरण का श्रेय दिया जाता है।
नेपाल की मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने पूर्व में ओली सरकार पर देश के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में सामने आई राजतंत्र समर्थक रैलियों का समर्थन करने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) ने इस महीने की शुरुआत में नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र और हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग करते हुए देश की राजधानी में सरकार विरोधी रैली का आयोजन किया था।
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