देश की खबरें | मोदी ने यूक्रेन संकट पर उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, 8,000 भारतीयों की वापसी

नयी दिल्ली, 28 फरवरी केंद्र सरकार ने यूक्रेन में फंसे छात्रों समेत भारतीयों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में समन्वय के लिए चार केंद्रीय मंत्रियों को युद्धग्रस्त देश के पड़ोसी देशों मे भेजने का सोमवार को फैसला किया। वहीं, विदेश मंत्रालय ने पिछले पखवाड़े में अब तक यूक्रेन से 8,000 भारतीयों के वापस आने की जानकारी दी।

मंत्रियों को भेजने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में संपन्न एक उच्च स्तरीय बैठक में किया गया।

सूत्रों ने बताया कि मोदी ने निजी तौर पर चारों मंत्रियों से बात कर उन्हें इस फैसले से अवगत कराया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, किरेन रिजिजू और वी के सिंह भारत के ‘‘विशेष दूत’’ के तौर पर यूक्रेन के पड़ोसी देशों में जाएंगे।

उन्होंने बताया कि सिंधिया भारतीयों को यूक्रेन के निकालने के अभियान के लिए समन्वय का काम रोमानिया और मोल्दोवा से संभालेंगे, जबकि रिजिजू स्लोवाकिया जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि पुरी हंगरी जाएंगे और सिंह भारतीयों को निकालने का प्रबंध करने के लिए पोलैंड जाएंगे।

इन मंत्रियों को यूक्रेन के पड़ोसी देशों में भेजने का फैसला करने से एक दिन पहले ही मोदी ने कहा था कि युद्धग्रस्त देश में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उन्हें बाहर निकालना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।

सोमवार को हुई बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला समेत कई मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

मोदी ने रविवार को भी यूक्रेन संकट पर एक बैठक की अध्यक्षता की थी। सूत्रों ने बताया था कि बैठक में यूक्रेन के पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और बढ़ाने का फैसला किया गया था, ताकि भारतीय छात्रों को युद्धग्रस्त देश से तेजी से बाहर निकाला जा सके।

इस बीच, सूत्रों ने बताया कि विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने सोमवार को संसद की एक समिति को युद्धग्रस्त यूक्रेन की स्थिति और इस पूर्वी यूरोपीय देश के पांच पड़ोसी देशों के माध्यम से भारतीय नागरिकों को निकालने के भारत के प्रयासों की जानकारी दी।

श्रृंगला ने विदेश मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति को बताया कि भारतीयों की निकासी के प्रयासों के तहत यूक्रेन के पांच पड़ोसी देशों हंगरी, पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया और मोल्दोवा में रूसी बोलने वाले अधिकारियों को भेजा गया है।

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