जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन में मिला-जुला कारोबारी रुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को मिले जुले रुख के साथ कारोबार हुआ। मंडियों में नये फसल की आवक बढ़ने के बीच सरसों तेल तिलहन कीमतों में गिरावट रही। वहीं बृहस्पतिवार के मुकाबले सोयाबीन तेल, बिनौला, मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती रही। सोयाबीन तिलहन का भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुआ।
नयी दिल्ली, 17 फरवरी दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शुक्रवार को मिले जुले रुख के साथ कारोबार हुआ। मंडियों में नये फसल की आवक बढ़ने के बीच सरसों तेल तिलहन कीमतों में गिरावट रही। वहीं बृहस्पतिवार के मुकाबले सोयाबीन तेल, बिनौला, मूंगफली तेल-तिलहन, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती रही। सोयाबीन तिलहन का भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुआ।
बाजार सूत्रों ने कहा कि मलेशिया एक्सचेंज में 1.5 प्रतिशत का सुधार रहा जबकि शिकॉगो एक्सचेंज फिलहाल एक प्रतिशत मंदा है।
उन्होंने कहा कि हल्के तेलों में जो कल के मुकाबले मजबूती दिख रही है, वह अभी भी देशी तेल तिलहनों से काफी नीचे ही है। इन हल्के तेलों के भाव ऊंचे बोले जा रहे हैं जबकि ग्राहकी बेहद मंदा है। सरसों के नये फसल की मंडियों में आज आवक बढ़कर 4.5 लाख बोरी हो गई और सस्ते आयातित तेलों से पटे बाजार में इसके तेल तिलहन के भाव में गिरावट देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार खाद्य तेलों को व्यवस्थित रखने के लिए या कीमत बढ़ने की स्थिति में इसे काबू में लाने के लिए सरकार को अपने प्राचीन तरीके पर गौर करना चाहिये जिसमें तेल तिलहन कारोबार के किसी भी अंशधारक को कोई दिक्कत पेश नहीं आती थी और उपभोक्ताओं को वाजिब दाम पर खाद्यतेल मिल जाते थे।
उन्होंने कहा कि यह तरीका था कि सरकार खुद ही खाद्यतेलों का आयात कर आम जनता के बीच आवंटन के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को दे देती थी और कोई बिचौलिया नहीं होता था जो दाम में मनमानी घट बढ़ करे। पीडीएस प्रणाली को अपनाकर ही तेल तिलहन उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सूत्रों ने कहा कि देश में तेल तिलहन उद्योग से देश का दूध व्यवसाय भी गहरे रूप से जुड़ा है क्योंकि इस उद्योग से मवेशियों के लिए तेल खल और मुर्गीदाने के लिए डी-आयल्ड केक (डीओसी) प्राप्त होते हैं। यानी खल और डीओसी के दाम बढ़ेंगे तो दूध एवं दुग्ध उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे जैसा कि हाल के कुछ महीनों में हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को आयात शुल्क घटाते बढाते समय इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिये कि सॉफ्ट आयल पर आयात शुल्क न घटाये क्योंकि हमारे सारे देशी तेल तिलहन हल्के तेलों में आते हैं और विदेशों में हल्के तेलों के दाम टूटने से हमारे देशी तेल तिलहन उद्योग और किसान दोनों गंभीर रूप से प्रभावित होते हैं जैसा कि मौजूदा समय में हो रहा है।
शुक्रवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,840-5,890 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,775-6,835 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,550 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,540-2,805 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 12,180 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,955-1,985 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,915-2,040 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 12,370 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 12,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 10,650 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,950 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 10,800 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,500 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,450-5,580 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,190-5,210 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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