देश की खबरें | सीएमडीआरएफ मामले का 'दुरुपयोग': न्यायाधीशों पर आक्षेपों से लोकायुक्त नाराज
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल के लोकायुक्त ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके कैबिनेट सहयोगियों द्वारा सीएमडीआरएफ का कथित दुरुपयोग किए जाने के मामले में आदेश से नाखुश लोगों को इसे अदालत में चुनौती देनी चाहिए, न कि फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाया जाना चाहिए।
तिरुवनंतपुरम, 17 अप्रैल केरल के लोकायुक्त ने सोमवार को कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और उनके कैबिनेट सहयोगियों द्वारा सीएमडीआरएफ का कथित दुरुपयोग किए जाने के मामले में आदेश से नाखुश लोगों को इसे अदालत में चुनौती देनी चाहिए, न कि फैसला सुनाने वाले न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाया जाना चाहिए।
भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी ने कहा कि मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष (सीएमडीआरएफ) के मामले में उसके हाल के दो आदेशों की गलत व्याख्या की जा रही है।
इसने कहा, "कानून की अदालत में उन आदेशों को चुनौती देने के बजाय, न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाया जा रहा है और शिकायतकर्ता तथा कुछ राजनीतिक नेताओं द्वारा उनका अपमान किया जा रहा है, और इसे कुछ मीडिया घरानों द्वारा प्रचारित किया जा रहा है। ऐसा आचरण आपत्तिजनक है।"
लोकायुक्त ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि इस मामले को 31 मार्च को एक बड़ी पीठ के पास भेजा गया था। इसमें कहा गया कि पीठ में दो न्यायाधीशों के बीच इस बात को लेकर मतभेद था कि क्या मुख्यमंत्री और उनकी कैबिनेट के फैसलों की केरल लोकायुक्त अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच की जा सकती है।
इसमें कहा गया कि मामले के गुण-दोष को लेकर भी मतभेद थे।
शिकायतकर्ता आर एस शशिकुमार की 31 मार्च के आदेश को वापस लेने की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए लोकायुक्त की खंडपीठ ने पहले ही इन कारणों का हवाला दिया था।
विज्ञप्ति में भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी ने कहा कि सीएमडीआरएफ मामले के आदेशों के संबंध में कुछ लोगों द्वारा मीडिया में गलत खबरें प्रसारित की जा रही हैं।
इसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री की इफ्तार पार्टी में शामिल होने के चलते भी न्यायाधीशों पर आक्षेप लगाए गए।
इसने कहा कि यह कहना बहुत ही अनुचित है कि लोकायुक्त न्यायाधीशों ने सरकार के पक्ष में इसलिए आदेश पारित किया क्योंकि वे मुख्यमंत्री की इफ्तार पार्टी में शामिल हुए थे।
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