नयी दिल्ली, तीन जनवरी केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के पांच नक्सल-हिंसा प्रभावित जिलों के नाम अधिसूचित किये हैं। राज्य सरकार ने हाल में इनकी क्षेत्रीय सीमाओं का पुनर्गठन किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ परामर्श करते हुए समीक्षा की थी जिसके बाद नये वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित जिलों को चिह्नित किया गया है।
इन जिलों की संख्या पांच है। जून 2021 में पिछली ऐसी अधिसूचना में भी इतने ही जिलों के नाम चिह्नित किये गये थे।
गत आठ दिसंबर, 2022 को गृह मंत्रालय के वामपंथी उग्रवाद विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में अल्लूरी सीताराम राजू, पूर्व गोदावरी, पार्वतीपुरम मान्यम, श्रीकाकुलम और विशाखापत्तनम को राज्य के वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के रूप में चिह्नित किया गया है।
अधिसूचना के अनुसार इन पांच जिलों को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अब विशेष केंद्रीय कोष प्रदान किया जाएगा, जैसा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के लिए सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत दिया जाता है।
अल्लूरी सीताराम राजू को आंध्र प्रदेश के ‘सर्वाधिक प्रभावित वामपंथी उग्रवाद वाले जिले’ के रूप में श्रेणीबद्ध किया गया है। जिन जिलों में देश में 85-90 प्रतिशत माओवादी हिंसा होती है, उन्हें इस श्रेणी में रखा जाता है।
इससे पहले जून 2021 में गृह मंत्रालय की पिछली अधिसूचना के अनुसार जिन पांच जिलों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों के रूप में चिह्नित किया गया था उनमें पूर्वी गोदावरी, श्रीकाकुलम, विशाखापत्तनम, विजयनगरम और पश्चिम गोदावरी हैं।
अधिकारियों ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार के आग्रह पर जिलों के वर्गीकरण में बदलाव किया गया जिसने पिछले साल सितंबर में गृह मंत्रालय को सूचित किया था कि मुख्यमंत्री वाई एस जगनमोहन रेड्डी नीत राज्य सरकार ने राज्य के जिलों का पुनर्गठन किया है।
उन्होंने कहा कि इसलिए पुराने पांच जिलों वाले माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का 11 नये जिलों में पुनर्गठन किया गया है। राज्य सरकार ने एसआरई योजना के तहत इन 11 जिलों को शामिल करने का अनुरोध किया था।
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