देश की खबरें | मेकेदातु परियोजना : शिवकुमार ने तमिलनाडु सरकार से कहा, हम आपको परेशानी में नहीं डालेंगे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को कनकपुरा के पास कावेरी नदी पर विवादास्पद मेकेदातु जलाशय की वकालत की और तमिलनाडु सरकार से उदारता दिखाने का अनुरोध किया।
बेंगलुरु, एक जून कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बृहस्पतिवार को कनकपुरा के पास कावेरी नदी पर विवादास्पद मेकेदातु जलाशय की वकालत की और तमिलनाडु सरकार से उदारता दिखाने का अनुरोध किया।
कनकपुरा से विधायक शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक सरकार को परियोजना के लिए आवश्यक तैयारियां करनी होंगी। उन्होंने दावा किया कि इस परियोजना का लाभ न केवल बेंगलुरु बल्कि तमिलनाडु के किसानों को भी मिलेगा।
शिवकुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेकेदातु के संबंध में हमने (2021 में) पानी के लिए मार्च निकाला था। तमिलनाडु को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। हमारे मार्च के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री (बसवराज बोम्मई) ने परियोजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये निर्धारित किए थे। यह प्रस्तावित है लेकिन अभी तक खर्च नहीं किया गया है। हमें आवश्यक तैयारी करनी होगी।’’
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं है कि हमें तमिलनाडु से कोई नफरत है या उसके खिलाफ कोई युद्ध छेड़ रखा है। वहां रहने वाले हमारे भाई हैं। इसलिए, घृणा या ईर्ष्या के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। यह हमारी परियोजना है। इसका फायदा उन्हें भी होगा। हमें कावेरी के आसपास के सभी किसानों की मदद करनी है।’’
यह दावा करते हुए कि मेकेदातु परियोजना को साकार करने करने की कुंजी केंद्र के पास है, शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक को कितना पानी छोड़ना है, इस संबंध में भी दिशा-निर्देश थे।
उन्होंने आश्चर्य जताया कि अगर कर्नाटक वहां बिजली संयंत्र स्थापित करता है तो तमिलनाडु को कैसे नुकसान होगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम पानी का भंडारण करेंगे और बेंगलुरु को इसकी आपूर्ति करेंगे। कावेरी न्यायाधिकरण के फैसले में इसे मंजूरी दी गई है। इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने तमिलनाडु सरकार से इस परियोजना पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि इससे उनके हित प्रभावित नहीं होंगे।
शिवकुमार ने कहा, ‘‘मैं आपसे (तमिलनाडु सरकार) अनुरोध करता हूं कि हम आपको परेशान नहीं करेंगे। उदारता दिखाएं। हम भी उदारता दिखा रहे हैं। हम पड़ोसी राज्य हैं। हमने काफी कानूनी लड़ाई लड़ी है और इससे कोई फायदा नहीं होने वाला। हम इससे सौहार्दपूर्वक निपटें। यह पीने का पानी उपलब्ध कराने में मदद करेगा और आपके किसानों को भी लाभान्वित करेगा।’’
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