जयपुर, 28 नवंबर चीन में श्वसन रोग के मामलों में वृद्धि को देखते हुए राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में संक्रामक रोगों की निगरानी एवं रोकथाम के लिए चिकित्सा प्रबंधन को पूरी सतर्कता से कार्य करने और इस बीमारी से बचाव एवं उपचार आदि व्यवस्थाओं के लिए तीन दिन में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने चीन में फैल रही श्वसन संबंधी बीमारी से बचाव के लिए तैयारियों हेतु मंगलवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अधिकारियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की ओर से जारी पत्र एवं उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार अभी तक स्थिति चिंताजनक नहीं है, लेकिन प्रदेशभर में संक्रामक रोगों की निगरानी एवं रोकथाम के लिए चिकित्सा प्रबंधन पूरी सतर्कता के साथ कार्य करे।
उन्होंने कहा कि सभी चिकित्सा संस्थानों में जांच, दवा, उपचार आदि के समुचित इंतजाम सुनिश्चित हों।
सिंह ने कहा कि जानकारी के अनुसार फिलहाल देश में इस बीमारी का एक भी मामला सामने नहीं आया है फिर भी एहतियातन चिकित्सा तंत्र को मजबूत रखने की दृष्टि से सजगता बरती जा रही है।
उन्होंने निर्देश दिए कि इस बीमारी से बचाव एवं उपचार आदि व्यवस्थाओं के लिए तीन दिन में कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने इसके लिए जिला एवं मेडिकल कॉलेज के स्तर पर एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने तथा संभाग एवं जिला स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया टीम का गठन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में बिस्तर, ऑक्सीजन, जांच, दवा, उपचार, मानव संसाधन एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए। चूंकि चीन में बच्चों में श्वसन रोग के मामले अधिक सामने आए हैं इसे देखते हुए शिशु रोग इकाइयों एवं मेडिसिन विभाग में उपचार के पर्याप्त इंतजाम हों।
उन्होंने कहा कि इस बीमारी के संबंध में जिला एवं राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा भी की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य एवं जिला स्तर के बड़े चिकित्सा संस्थानों में भर्ती सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (एसएआरआई) के रोगियों की ‘रेंडम सैम्पलिंग’ कर उनके नमूने जयपुर एवं जोधपुर स्थित प्रयोगशाला में भेजे जाएं।
उन्होंने कहा कि बच्चों, वृद्धजनों, गर्भवती महिलाओं एवं अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे रोगियों में संक्रमण की आशंका अधिक रहती है। अतः बचाव की दृष्टि से आमजन को आवश्यक उपाय अपनाने के लिए जागरूक किया जाए।
अधिकारी ने बुधवार को प्रदेश के चिकित्सा संस्थानों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता की दृष्टि से ‘मॉकड्रिल’ (स्थिति उत्पन्न होने पर उससे निपटने का पूर्वाभ्यास)का आयोजन करने के निर्देश भी दिए।
इस ‘मॉकड्रिल’ के दौरान बैड, जांच, दवा, एम्बुलेंस, मानव संसाधन एवं आवश्यक उपकरणों आदि की निगरानी की जाएगी। यह ‘मॉकड्रिल’ मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक होगी।
सिंह ने कहा कि भारत सरकार की ओर से इस बीमारी से बचाव के संबंध में जारी परामर्श तथा चिकित्सा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों की पालना सुनिश्चित की जाए।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कहा कि चूंकि यह एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसके रोगियों के लिए अलग से एम्बुलेंस चिन्हित की जाए ताकि अन्य रोगियों में संक्रमण नहीं फैले। उन्होंने इसके लिए आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिवप्रसाद नकाते ने चिकित्सा महाविद्यालयों से जुड़े अस्पतालों में दिशानिर्देश के अनुरूप सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों में बुधवार को मॉकड्रिल गंभीरता के साथ की जाए।
बैठक में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश माथुर ने बताया कि चीन में बच्चों में श्वसन रोग के मामले बढ़ने की जानकारी सामने आई है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह इंफ्लूएंजा, माइक्रोप्लाज्मान्यूमोनिया एवं सॉर्सकॉव-2 आदि के कारण होना पाया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में श्वसन रोग विशेषकर कोविड-19 एवं म्यूकोरमाइकोसिस के शून्य मामले हैं। संक्रामक रोगों से बचाव एवं नियंत्रण के लिए चिकित्सा विभाग ने पूरी तैयारी कर रखी है।
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