जरुरी जानकारी | राज्यों की बाजार उधारी वित्त वर्ष में अब तक 55 प्रतिशत बढ़कर 3.75 लाख करोड़ रुपये पर पहुंची

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. इस वित्त वर्ष में अब तक राज्यों की बाजार से उठाई गई उधारी 55 प्रतिशत बढ़कर 3.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि उनके इस वर्ष के बजट में तय की गई सालाना राशि का 75 प्रतिशत तक है। इनमें से 17 राज्यों ने राज्य विकास रिण की मंगलवार को हुई नवीनतम नीलामी में 22,350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जुटाई है।

मुंबई, सात अक्टूबर इस वित्त वर्ष में अब तक राज्यों की बाजार से उठाई गई उधारी 55 प्रतिशत बढ़कर 3.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि उनके इस वर्ष के बजट में तय की गई सालाना राशि का 75 प्रतिशत तक है। इनमें से 17 राज्यों ने राज्य विकास रिण की मंगलवार को हुई नवीनतम नीलामी में 22,350 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जुटाई है।

इस वित्त वर्ष की शुरुआत से ही कोविड- 19 महामारी के कारण राज्यों के राजस्व पर बुरा असर पड़ा है। दूसरी तरफ केन्द्र सरकार भी उन्हें उनकी माल एवं सेवाकर (जीएसटी) बकाये का भुगतान नहीं कर पा रही है। इससे राज्य रिण जाल में उलझते जा रहे हैं।

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नवीनतम रिण प्राप्ति अधिसूचित राशि के मुकाबले 1,200 करोड़ रुपये अधिक रही है। महाराष्ट्र और झारखंड ने इस दौरान क्रमश: 1,000 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये अधिक राशि उठाई है।

केयर रेटिंग्स के ताजा विश्लेषण के मुताबिक इस वित्त वर्ष में अब तक (सात अप्रैल से लेकर छह अक्ट्रबर 2020) 28 राज्यों और दो संघ शासित प्रदेशों ने बाजार से कुल मिलाकर 3.75 लाख करोड़ रुपये का उधार लिया है। यह राशि एक साल पहले इसी अवधि में इन राज्यों द्वारा उधार ली गई 2.43 लाख करोड़ रुपये से 55 प्रतिशत अधिक है।

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चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाही के उधारी चार्ट के मुताबिक इस दौरान राज्य बाजार से 5.07 लाख करोड़ रुपये जुटा सकते हैं। इसमें से राज्य करीब 75 प्रतिशत राशि पहले ही उठा चुके हैं। पहली तिमाही में तय उधारी कार्यक्रम के मुकाबले राज्यों ने 16 प्रतिशत अधिक (48,115 करोड़ रुपये) का उधार बाजार से लिया है।

चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से ही राज्यों की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ा है। कोविड-19 के प्रसार पर काबू रखने के लिये मार्च अंत से लागू लॉकडाउन के चलते जहां एक तरफ राज्यों की राजस्व प्राप्ति काफी कम रही है वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य सुविधाओं पर खर्च तेजी से बढ़ा है। इससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है।

महाराष्ट्र, तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान सबसे ज्यादा उधार लेने वाले राज्य हैं। राज्यों के कुल उधार में इन राज्यों का हिस्सा 52 प्रतिशत तक है। अरुणाचल प्रदेश, बिहार, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, मणपुर, उत्तर प्रदेश और त्रिपुरा जैसे राज्यों की उधारी 21 से लेकर 343 प्रतिशत तक बढ़ी है।

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