देश की खबरें | मांजरेकर ने गंभीर पर निशाना साधते हुए कहा: उन्हें मीडिया से दूर रखें, उनका आचरण सही नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गौतम गंभीर पर अप्रत्याशित रूप से तीखा हमला बोलते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने सोमवार को कहा कि भारतीय मुख्य कोच के पास प्रेस से बातचीत करते समय ‘सही आचरण और शब्दों’ का अभाव है और उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) से उन्हें मीडिया से बात करने की जिम्मेदारियों से दूर रखने का आग्रह किया।

नयी दिल्ली, 11 नवंबर गौतम गंभीर पर अप्रत्याशित रूप से तीखा हमला बोलते हुए पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने सोमवार को कहा कि भारतीय मुख्य कोच के पास प्रेस से बातचीत करते समय ‘सही आचरण और शब्दों’ का अभाव है और उन्होंने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) से उन्हें मीडिया से बात करने की जिम्मेदारियों से दूर रखने का आग्रह किया।

मांजरेकर की यह टिप्पणी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैच की बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए प्रस्थान से पूर्व गंभीर की प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ घंटों बाद आई है।

अपनी बेबाकी के लिए पहचाने जाने वाले गंभीर ने बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले विराट कोहली और रोहित शर्मा के रन बनाने के लिए संघर्ष करने, कोहली की फॉर्म पर रिकी पोंटिंग की टिप्पणी, भारतीय टीम में बदलाव के दौर और ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम संयोजन पर सवालों के जवाब दिए।

मांजरेकर ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘मैंने अभी-अभी गंभीर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में देखा। बीसीसीआई के लिए उन्हें इस तरह की जिम्मेदारियों से दूर रखना समझदारी होगी, उन्हें पर्दे के पीछे से काम करने देना चाहिए।’’

मांजरेकर ने सुझाव दिया कि कप्तान रोहित शर्मा और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर मीडिया को संभालने के लिए बेहतर होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘उनके (गंभीर) पास बातचीत करते समय ना तो सही व्यवहार है और न ही सही शब्द। रोहित और अगरकर मीडिया के सामने आने के लिए बेहतर लोग हैं।’’

हालांकि मांजरेकर ने अपने ट्वीट में यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें गंभीर की प्रेस कॉन्फ्रेंस का कौन सा हिस्सा आपत्तिजनक लगा।

पीटीआई ने मांजरेकर से उनके अवलोकन के बारे में अधिक जानने की कोशिश की लेकिन उन्होंने ना तो फोन का जवाब दिया और न ही ‘टेक्स्ट’ संदेश का।

विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा रहे भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गंभीर से भारत की 12 साल में घरेलू मैदान पर पहली टेस्ट श्रृंखला हार के मद्देनजर कई तीखे सवाल पूछे गए जिसके परिणामस्वरूप टीम की डब्ल्यूटीसी फाइनल में जगह बनाने की राह मुश्किल हो गई है।

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