ताजा खबरें | लोकसभा में प्रस्तुत मणिपुर का बजट जन विरोधी : राज्य से सांसद अल्फ्रेड आर्थर ने किया दावा

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नयी दिल्ली, 11 मार्च लोकसभा में प्रस्तुत मणिपुर के बजट को जन विरोधी बताते हुए कांग्रेस के एक सांसद ने दावा किया कि इसमें राज्य में हिंसा के दौरान विस्थापित हुए लोगों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सदन में मंगलवार को वर्ष 2024-25 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच, 2021-22 के लिए अतिरिक्त अनुदानों की मांगों और 2025-26 के लिए मणिपुर के संबंध में अनुदान की अनुपूरक मांगों पर चर्चा हुई।

आउटर मणिपुर से कांग्रेस सांसद अल्फ्रेड आर्थर ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि राज्य के लिए यहां प्रस्तुत बजट जन विरोधी है क्योंकि वर्तमान में प्रदेश में 60,000 लोग विस्थापित हैं, उनके घर क्षतिग्रस्त हैं, या नष्ट हो गए हैं लेकिन बजट में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

आर्थर ने कहा, ‘‘बजट में संविधान की अवहेलना की गई है। पहली बार आठ विभिन्न प्रकार की प्रस्तुतियां देख रहा हूं। आपने इसे इतना जटिल क्यों बनाया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के पर्वतीय इलाकों में 95 से 98 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन जब एक क्षेत्र की तुलना में दूसरे क्षेत्र में अधिक विकास कार्य किया जाएगा तो समस्या पैदा होगी। यदि कोई विसंगति है तो उसे दूर किया जाए।’’

आर्थर ने कहा, ‘‘मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि इस राष्ट्र के निर्माण में मणिपुर के निर्माण को भी शामिल किया जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे राज्य के साथ आज क्या हो रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?’’

आर्थर ने कहा कि देश में, मणिपुर में सबसे कम प्रति व्यक्ति आय सृजित हो रही है, लेकिन नीति आयोग इस दिशा में काम क्यों नहीं कर रहा है?

चर्चा में भाग लेते हुए शिवसेना (शिंदे गुट) के धैर्यशील माने ने कहा, ‘‘विपक्ष की आदत है सरकार की हर योजना की आलोचना करना, लेकिन इस सरकार ने हमेशा आम आदमी को ध्यान में रखते हुए काम किया है।’’

उन्होंने कहा कि आलोचनाओं के बीच विपक्ष शायद यह भूल रहा है कि आज देश नीतियों की बात कर रहा है जबकि उनके समय घोटालों की बात होती थी।

उन्होंने कहा, ‘‘कल विपक्ष के नेता ने ईवीएम पर फिर से सवाल उठाया। विपक्ष जनादेश को अपमानित करने का काम कर रहा है।’’

माने ने अलमट्टी बांध मामले में केंद्र से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया ताकि इसकी ऊंचाई बढ़ाने का काम रूके।

उत्तर प्रदेश के देवरिया से भाजपा सांसद शशांक मणि ने कहा, ‘‘कुछ सप्ताह पहले नेता प्रतिपक्ष ने बजट पर चर्चा के दौरान कहा था कि सरकार को एक परिवर्तनकारी आर्थिक विमर्श करना चाहिए। लेकिन मैं उन्हें और कांग्रेस के नेताओं को कहना चाहता हूं कि वे अपना नजरिया बदलें। मैं इनके चश्मे को समझता हूं क्योंकि इन्होंने हमेशा देश को इसी तरह से देखा है और लोगों को दीनहीन समझा है।’’

उन्होंने रक्षा क्षेत्र संबंधी अनुदान की अनुपूरक मांग पर कहा कि आने वाले समय में ड्रोन से संबंधित यदि कोई बटालियन बनाई जाए तो उसका नामकरण (स्वतंत्रता सेनानी) मंगल पांडे और रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर किया जाए।

बिहार के झंझारपुर से जद(यू) सांसद रामप्रीत मंडल ने चर्चा में भाग लेते हुए उम्मीद जताई कि मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल होगी और राज्य में निर्वाचित सरकार बनेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और वहां शांति स्थापना के लिए बजटीय प्रावधान महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार दोनों समुदायों (कुकी और मेइती) को एक मेज पर बैठा कर बातचीत करे। हिंसा के दौरान जो अविश्वास पैदा हुआ है उसे पाटने की जरूरत है। यदि सभी पक्ष के प्रतिनिधि साथ बैठकर बातचीत करते हैं तो समस्या का हल निकल जाएगा।’’

मंडल ने बिहार का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘मेरा राज्य विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ है। राज्य के विशेष दर्जे की मांग भी लंबित है। उस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।’’

तेदेपा के कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी और भाकपा के के. सुब्बारायण ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।

तृणमूल कांग्रेस की सयानी घोष ने कहा कि अगर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन ही उपाय था तो यह पहले क्यों नहीं लगाया गया और राज्य को ‘‘इतने महीनों तक जलने क्यों दिया गया।’’

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से भाजपा के राजू बिस्टा ने राज्य में चाय बागान मजदूरों के अधिकार हड़पे जाने का आरोप लगाया।

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