देश की खबरें | ममता ने की राज्यपाल की आलोचना, राजभवन के बाहर धरने की धमकी दी

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कोलकाता, पांच सितंबर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यपाल सी वी आनंद बोस पर राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों को अटका कर रखने का मंगलवार को आरोप लगाया और ‘‘ऐसी स्थिति जारी रहने पर’’ राजभवन के बाहर धरने पर बैठने की धमकी दी।

बनर्जी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक सरकारी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि राज्यपाल राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय राज्यपाल के निर्देशों के अनुसार काम करना जारी रखेंगे, तो वह उनका वित्तपोषण रोक देंगी।

बनर्जी ने कहा, ‘राज्यपाल के कदम राज्य प्रशासन को पंगु बनाने की कोशिश हैं। वह विधानसभा द्वारा पारित एक भी विधेयक लौटा नहीं रहे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यदि संघवाद (राज्य सरकार के) अधिकार छीनकर हस्तक्षेप कर रहा है, तो मुझे राजभवन के बाहर धरने पर बैठना पड़ेगा। हम अन्याय नहीं होने देंगे। बंगाल को लड़ना आता है। देखिए और इंतजार कीजिए।’’

बनर्जी ने कहा कि सरकार कानूनी कदम उठाएगी।

बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्यपाल विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की कार्य प्रणाली में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सभी नीतियां बनाता है। यदि आप हस्तक्षेप करते हैं, मैं उन सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की निधि रोक दूंगी जो आपके निर्देशों का पालन करते हैं। मैं देखूंगी कि आप कुलपतियों का वेतन कैसे देंगे।’’

राज्यपाल ने राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर रविवार रात को सात विश्वविद्यालयों में अंतरिम कुलपतियों की नियुक्ति की थी। जिन सात विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति की गई, उनमें ‘प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय’, ‘मौलाना अबुल कलाम आजाद प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय’ और ‘ बर्द्धमान विश्वविद्यालय’ भी शामिल हैं।

सूत्रों ने बताया कि नौ अन्य विश्वविद्यालयों के अंतरिम कुलपतियों के नाम भी तय कर लिए गए हैं और उन्हें ‘‘जल्द ही’’ नियुक्ति पत्र जारी किए जाएंगे।

बनर्जी ने कहा कि कुलपतियों को पांच सदस्यीय समिति द्वारा सुझाए गए नामों में से चुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यपाल सुझावों की परवाह किए बिना अपनी इच्छा से व्यक्तियों को नियुक्त कर रहे हैं। उन्होंने भाजपा (भारतीय जनता पार्टी) के एक व्यक्ति को आधी रात में यादवपुर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया। उन्होंने केरल काडर के एक आईपीएस अधिकारी को आलिया जैसे संवेदनशील विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया। उन्होंने ऐसे व्यक्ति को रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया, जिसे कोई शैक्षणिक अनुभव नहीं है।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था के पतन की साजिश है।

बनर्जी ने कहा, ‘‘हम ऐसा नहीं होने देंगे। अगर राज्यपाल सोचते हैं कि वह मुख्यमंत्री से बड़े हैं, तो हम उनसे लड़ेंगे। उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्हें इस पद के लिए नामित किया गया है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के ‘‘कृत्यों से’’ उनका दिल दुखी होता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उन्हें पहले भी कहा था कि ऐसी बातें न करें, लेकिन वह पिछले तीन-चार महीने से ऐसा ही कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान कुलाधिपति का पद वाइसराय की कुर्सी का सम्मान करने के लिए बनाया गया था और आजादी के बाद राज्यपाल को कुलाधिपति बना दिया गया, लेकिन यह एक मानद पद ही है।

बनर्जी ने विस्तार से नहीं बताते हुए कहा, ‘‘राजभवन का खर्च राज्य सरकार वहन करती है, न कि माननीय राज्यपाल।’’

उन्होंने पिछले कुछ महीनों में राज्यपाल द्वारा अपने पदों से हटाए गए कुलपतियों से न डरने की अपील की और समारोह में मौजूद शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु से उनके साथ एक बैठक बुलाने को कहा।

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