ठाणे, 11 अप्रैल महाराष्ट्र में पुणे के एक अस्पताल में एक महिला को भर्ती करने से कथित तौर पर इनकार किये जाने के बाद उसकी मौत से गुस्साए लोगों द्वारा हिंसा और तोड़फोड़ किए जाने संबंधी घटना की ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन’ (आईएमए) ने निंदा की है।
आईएमए महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम ने महिला की मौत पर दुख जताया और जनता तथा प्राधिकारियों से आग्रह किया कि जांच पूरी होने तक वे जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालें।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) अमित गोरखे के निजी सचिव की पत्नी तनीषा भिसे को पिछले महीने 10 लाख रुपये जमा न करने पर दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती करने से कथित तौर पर मना कर दिया गया था। महिला ने दूसरे अस्पताल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था और इसके बाद महिला की मौत हो गई।
आईएमए ने एक विज्ञप्ति में कहा कि घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने प्रदर्शन किया और पुणे में डॉ. सुश्रुत घैसास के चैरिटेबल अस्पताल में तोड़फोड़ की।
आईएमए ने इस बात पर जोर दिया कि निजी और कॉर्पोरेट स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में दाखिले के समय जमा राशि की मांग करना एक मानक प्रशासनिक प्रोटोकॉल है और स्पष्ट किया कि परामर्शदाताओं को आमतौर पर कुल बिल का केवल आठ से 10 प्रतिशत ही मिलता है।
एसोसिएशन ने राजनीतिक नेताओं द्वारा की गई गैर-जिम्मेदाराना सार्वजनिक बयानबाजी की भी आलोचना की। उसने दावा किया कि इससे चिकित्सा पेशे की छवि खराब हुई।
आईएमए ने पुणे नगर निगम (पीएमसी) द्वारा 500 से अधिक अस्पतालों को नोटिस जारी करने की पहल पर भी आपत्ति जताई। इस नोटिस में उन्हें मरीजों से जमा राशि न लेने का निर्देश दिया गया है।
आईएमए ने नगर निगम प्राधिकारियों से निर्देशों पर पुनर्विचार करने की अपील की।
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