औरंगाबाद, 24 जून महाराष्ट्र सरकार की क्षेत्रीय उप-समिति औरंगाबाद शहर के पास स्थित मशहूर दौलताबाद किले में रोपवे सुविधा उपलब्ध कराने के पक्ष में नहीं है।
गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने भी रोपवे सुविधा का विरोध किया है जिसकी मांग कुछ स्थानीय नेताओं ने पूर्व में की थी।
राज्य समिति के सदस्य संकेत कुलकर्णी ने दावा किया कि जगह की कमी और उत्खनन कार्य के कारण किले में रोपवे सुविधा स्थापित करना संभव नहीं है।
औरंगाबाद में गत 20 जून को क्षेत्रीय स्तर की किला संरक्षण समिति की बैठक हुई थी जिसमें पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय के निदेशक तेजस गर्ग और अन्य सदस्यों ने हिस्सा लिया था।
कुलकर्णी ने कहा, ‘‘देवगिरि किले की ऊंचाई ज्यादा नहीं है। इस किले का आकार शंकु के आकार का है और जैसे-जैसे हम ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जगह कम होती जाती है। शीर्ष पर रोपवे स्थापित करने के लिए जगह नहीं है। ऐसी सुविधा के लिए खुदाई करने की जरूरत होगी जिससे किला क्षेत्र कमजोर होगा और इसकी सुंदरता भी खराब हो जाएगी।’’
उन्होंने कहा कि लोग किले के शीर्ष पर पहुंचने के लिए डोली (लंबे बांस से बंधी कुर्सियां) का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे किले के ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचेगा तथा लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
देवगिरि का किला यादव राजवंश की राजधानी रहा और थोड़े समय के लिए दिल्ली सल्तनत की भी राजधानी रहा तथा बाद में यह अहमदनगर सल्तनत की दूसरी राजधानी बना।
यह पहाड़ी किला एक शंक्वाकार पहाड़ी पर करीब 200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
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