प्रवासी मजदूरों के रेल किराया भुगतान पर रेलवे से स्पष्टता चाहती है महाराष्ट्र सरकार

गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इन श्रमिकों के पास नौकरी नहीं है और इन लोगों से रेलवे को किराया नहीं वसूलना चाहिये।

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मुंबई, छह मई महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने बुधवार को बताया कि राज्य सरकार ने रेलवे से यह स्पष्ट करने के लिये कहा है कि लॉकडाउन के कारण फंसे प्रवासी श्रमिकों को वापस उनके घर भेजने में रेल यात्रा में आने वाली लागत का 85 फीसदी वह वहन करेगा या नहीं।

गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इन श्रमिकों के पास नौकरी नहीं है और इन लोगों से रेलवे को किराया नहीं वसूलना चाहिये।

भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को कहा था कि रेलवे ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिये चलायी जाने वाली विशेष ट्रेनों के किराये में 85 प्रतिशत सबसिडी दे रही है और बाकी बचे 15 फीसदी किराये का भुगतान राज्य सरकार को करना चाहिये ।

देशमुख ने कहा, 'महाराष्ट्र सरकार की ओर से, मैं भारतीय रेल से इसमें स्पष्टता चाहता हूं कि वह टिकट का 85 प्रतिशत वहन कर रहा है या नहीं । अबतक रेलवे से इस बारे में आधिकारिक आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।'

उन्होंने इंगित किया कि हर व्यक्ति यह जानता है कि इन प्रवासी श्रमिकों के पास पिछले 40 दिन से नौकरी नहीं है और वे अपने घर वापस जाने के लिये बेचैन हैं ।

देशमुख ने कहा कि रेलवे को प्रवासी श्रमिकों से किराया वसूलने से बचना चाहिये ।

एक अधिकारी ने बताया कि अबतक, करीब 36 हजार प्रवासी श्रमिक महाराष्ट्र से अपने गृह स्थान के लिये निकल चुके हैं ।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी की राज्य इकाई कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्यों में फंसे जरूरतमंद प्रवासी श्रमिकों के टिकट का खर्च वहन करेगी ।

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