ताजा खबरें | महापत्तन चर्चा दो अंतिम रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. विधेयक पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए बीजद के सुभाष चंद्र सिंह ने ओडिशा के पारादीप बंदरगाह का जिक्र किया और कहा कि लाभ में होने के बाद भी बंदरगाह द्वारा कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पर खर्च नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वहां के अस्पताल में 30 साल से कोई विकास नहीं हुआ है और सड़कों की स्थिति खराब है।
विधेयक पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए बीजद के सुभाष चंद्र सिंह ने ओडिशा के पारादीप बंदरगाह का जिक्र किया और कहा कि लाभ में होने के बाद भी बंदरगाह द्वारा कार्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पर खर्च नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वहां के अस्पताल में 30 साल से कोई विकास नहीं हुआ है और सड़कों की स्थिति खराब है।
द्रमुक के पी विल्सन ने आरोप लगाया कि यह विधेयक निजी क्षेत्र को, और खासकर एक खास औद्योगिक समूह को लाभ पहुंचाने के लिए है। उन्होंने कहा कि विधेयक के प्रावधानों से पत्तनों के विकास में राज्य की भूमिका कम होगी।
वाईएसआर पार्टी के अयोध्या रामी रेड्डी ने विधेयक को स्वागतयोग्य कदम बताया और कहा कि इससे जरूरी आधारभूत ढांचा विकसित करने में मदद मिलेगी तथा बड़े एवं छोटे बंदरगाहों के बीच संतुलन स्थापित हो सकेगा।
विधेयक का विरोध करते हुए सपा के रामगोपाल यादव ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार बंदरगाहों को विकसित कर उन्हें बेचना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर जन-संपदा को बेचना चाहती है तो उससे पहले उसकी पूरी संपत्ति का मूल्यांकन कर लेना चाहिए।
जद (यू) के आरसीपी सिंह ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि चारों ओर स्थल से घिरे राज्यों के लिए भी खास प्रावधान होने चाहिए और उन्हें अपना बंदरगाह विकसित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
भाकपा के विनय विश्वम और आप के नारायण दास गुप्ता ने भी विधेयक का विरोध किया। बसपा के रामजी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार की मंशा कुछ और है। उन्होंने कहा कि बंदरगाहों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
टीएमसी (एम) सदस्य जी के वास ने विधेयक का स्वागत किया और कहा कि इससे प्रमुख बंदरगाहों को अधिक अधिकार मिल सकेंगे और उनका विकास होगा।
माकपा के इलामारम करीम ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इसमें बंदरगाहों को कार्पोरेट इकाई में बदलने का प्रस्ताव किया गया है।
राजद के मनोज झा ने आरोप लगाया कि यह विधेयक निजी क्षेत्र को लाभ पहुंचाने के लिए है।
चर्चा में टीआरस के बंदा प्रकाश, तेदेपा के कनकमेदला रवींद्र कुमार, राकांपा की फौजिया खान, शिवसेना के अनिल देसाई, भाकपा के विनय विश्वम, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै, भाजपा के जुगलसिंह माथुरजी लोखंडवाला ने भी भाग लिया।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)