देश की खबरें | मध्यप्रदेश : चयनित शिक्षकों ने नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर भाजपा कार्यालय पर किया प्रदर्शन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. सरकारी शिक्षक पदों के लिए तीन साल पहले चयनित हो चुके लोगों ने उन्हें औपचारिक नियुक्ति पत्र दिए जाने की मांग को लेकर बुधवार को यहां मध्य प्रदेश की सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

भोपाल, 18 अगस्त सरकारी शिक्षक पदों के लिए तीन साल पहले चयनित हो चुके लोगों ने उन्हें औपचारिक नियुक्ति पत्र दिए जाने की मांग को लेकर बुधवार को यहां मध्य प्रदेश की सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।

महिलाओं सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारी अपने हाथों में राखियों से सुसज्जित थाली लेकर प्रदेश भाजपा कार्यालय के बाहर इकट्ठा हुए और धरने पर बैठ गये।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक वर्ष 2018 में 22,000 शिक्षकों का चयन किया गया था लेकिन उन्हें राज्य सरकार द्वारा अब तक नियुक्ति पत्र नहीं दिए गए।

एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, ‘‘हम चयनित शिक्षक हैं, लेकिन पिछले तीन साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं । हम सभी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा पास कर ली है। हम नियुक्ति पत्र के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं । यह सरकार पिछले डेढ़ साल से दस्तावेजों का सत्यापन कर रही है।’’

एक अन्य प्रदर्शनकारी महिला ने कहा कि अधिकारी हमें सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘हमने आज अनशन किया है। हम चाहते हैं कि मामा जी (मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्हें मामा जी के नाम से जाना जाता है) आयें और हमसे राखी बंधवाने के बाद हमें नियुक्ति पत्र दें।’’

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछेक महिलाएं बेहोश हो गईं थीं।

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उन्होंने कहा, ‘‘आरक्षण से जुड़ा एक मामला उच्च न्यायालय में लंबित है। इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग भी पक्षकार है। हम अदालत के निर्देशों का इंतजार कर रहे हैं। अदालत के निर्देश मिलते ही विभाग नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर देगा।’’

इस बीच, भाजपा के प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि कानूनी समस्याओं के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी हो रही है। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें देरी हो रही है क्योंकि पिछली कांग्रेस नीत सरकार ने इस मुद्दे पर कदम नहीं उठाया था। भाजपा सरकार तब आई जब कोरोना वायरस महामारी थी और कानूनी जटिलता भी नियुक्ति के रास्ते में आ गई।’’

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