देश की खबरें | मप्र के पत्रकारों को गिरफ्तारी से शीर्ष अदालत का अंतरिम संरक्षण, उच्च न्यायालय जाने को कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मध्य प्रदेश के उन दो पत्रकारों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया, जिन पर अवैध रेत खनन गतिविधियों की रिपोर्टिंग करने के लिए राज्य पुलिस ने कथित रूप से हमला किया था।

नयी दिल्ली, नौ जून उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मध्य प्रदेश के उन दो पत्रकारों को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया, जिन पर अवैध रेत खनन गतिविधियों की रिपोर्टिंग करने के लिए राज्य पुलिस ने कथित रूप से हमला किया था।

हालांकि, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और उन्हें मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जाने को कहा।

शीर्ष अदालत की एक अलग पीठ ने पत्रकार- शशिकांत जाटव और अमरकांत सिंह चौहान- की याचिका पर चार जून को मध्य प्रदेश और दिल्ली सरकार से जवाब तलब किया था। न्यायालय ने, साथ ही अंतरिम राहत देते हुए सुनवाई आज (नौ जून) के लिए स्थगित कर दी थी।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘‘हम याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं। हालांकि, आरोपों को देखते हुए हम याचिकाकर्ताओं को आज से दो सप्ताह के भीतर संबंधित उच्च न्यायालय जाने की अनुमति देते हैं। जब तक याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय नहीं जाते ...याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।’’

पत्रकारों ने आरोप लगाया कि उन्हें उठा लिया गया और हिरासत में उन पर हमला किया गया और एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा उनके अधीनस्थों ने उन्हें जातिवादी गालियां दीं।

शीर्ष अदालत ने इससे पहले सवाल किया था कि याचिकाकर्ताओं ने भिंड के पुलिस अधीक्षक को याचिका में पक्षकार क्यों नहीं बनाया।

उसने कहा, ‘‘किसी आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी को पक्षकार बनाए बिना उसके खिलाफ हर तरह की बातें कहना बहुत आसान है। आपके दिमाग में जो भी आता है, उसे आईपीएस अधिकारी के खिलाफ लिखकर दें।’’

पीठ ने यह भी पूछा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली को पक्ष क्यों बनाया गया।

वकील ने कहा कि एनएचआरसी को पक्ष इसलिए बनाया गया, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने पहले वहां शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि वकील ने मामले से आयोग को हटाने की पेशकश की थी।

दिल्ली के बारे में वकील ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में हैं।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 मई को चौहान को दो महीने की सुरक्षा प्रदान की थी। उन्होंने दावा किया था कि भिंड के पुलिस अधीक्षक द्वारा कथित पिटाई के बाद उनकी जान को खतरा है।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस को स्वराज एक्सप्रेस समाचार चैनल के भिंड ब्यूरो प्रमुख चौहान को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘इस बीच, वे (आगे कानूनी उपायों का लाभ उठाने के लिए) संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।’’

भिंड जिले के पत्रकारों ने हाल ही में आरोप लगाया था कि एक मई को पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के अंदर उनके साथ मारपीट की गई और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। हालांकि पुलिस अधिकारी ने इस आरोप से इनकार किया है।

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