देश की खबरें | मध्य प्रदेश ने एनएसए के तहत डॉक्टर की हिरासत को रद्द करने के आदेश के बारे में सूचित किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोपी एक डॉक्टर की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है।
नयी दिल्ली, तीन सितंबर मध्य प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि उसने इंदौर में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोपी एक डॉक्टर की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है।
राज्य सरकार ने कहा कि उसके फैसले के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने इंदौर के केंद्रीय जेल के जेल अधीक्षक को पत्र लिखा और डॉक्टर को बाद में रिहा कर दिया गया। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने अतिरिक्त महाधिवक्ता सौरभ मिश्रा की दलीलें दर्ज करने के बाद आसिफा खान की याचिका का निपटारा कर दिया। खान ने एनएसए के तहत अपने पति की हिरासत को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा उनकी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करने के 16 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान मिश्रा ने कहा कि 16 जुलाई को राज्य सरकार ने डॉक्टर की एनएसए के तहत हिरासत रद्द करने का फैसला किया और दो अगस्त को जिला मजिस्ट्रेट ने केंद्रीय जेल, इंदौर के जेल अधीक्षक को उन्हें रिहा करने के लिए पत्र लिखा था। पीठ ने कहा कि याचिका में कुछ भी नहीं बचा है क्योंकि आरोपी को रिहा कर दिया गया है और उसकी पत्नी द्वारा दायर याचिका का निपटारा कर दिया गया है।
पीठ ने कहा कि वह जमानत खारिज किए जाने के खिलाफ अपील पर तय समय में विचार करेगी।
याचिका में विभिन्न दलीलें दी गयी हैं, जैसे कि हिरासत आदेश में बंदी को ‘‘फरार’’ घोषित किया गया था, जबकि वह 13 मई से जेल में था। हिरासत को इस आधार पर भी चुनौती दी गई कि एनएसए, 1980 के तहत डॉक्टर की हिरासत की सिफारिश करने के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा संदर्भित दस्तावेजों को हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी को नहीं भेजा गया था।
कोविड-19 की दूसरी लहर के चरम के दौरान एक मई को इंदौर पुलिस ने एक अस्पताल के सामने रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया और विजयनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तार लोगों के बयान के आधार पर मामले में डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया गया। याचिका के अनुसार पुलिस ने उसके पास से कोई इंजेक्शन नहीं बरामद किया था, लेकिन उसके पास से 1,200 रुपये जब्त किए थे।
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