देश की खबरें | ‘लुक आउट सर्कुलर’ मुक्त आवाजाही में बाधक, असाधारण मामलों में ही इसे जारी करना चाहिए: अदालत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा है कि लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) किसी व्यक्ति की मुक्त आवाजाही और यात्रा करने के अधिकार को प्रतिबंधित करता है, इसलिए इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में ही जारी किया जाना चाहिए।
कोलकाता, 13 जून कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा है कि लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) किसी व्यक्ति की मुक्त आवाजाही और यात्रा करने के अधिकार को प्रतिबंधित करता है, इसलिए इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में ही जारी किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एलओसी वहां जारी किए जाते हैं जहां यह आशंका होती है कि संबंधित व्यक्ति विदेश से भारत नहीं लौट सकता। न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य ने ब्रिटेन जाने वाली उड़ान से उतार दिए गए एक दंपति के खिलाफ जारी एलओसी को खारिज करते हुए कहा कि इनकी अवधि काफी लंबी होती है।
अदालत ने कहा, ‘‘लुक आउट सर्कुलर किसी व्यक्ति की मुक्त आवाजाही और यात्रा करने के अधिकार को प्रतिबंधित करता है। इसे केवल असाधारण परिस्थितियों में जारी किया जाना चाहिए।’’
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि संबंधित व्यक्ति को कानून में पर्याप्त उपाय का विकल्प दिए बिना बैंकों को एलओसी जारी करने, इस्तेमाल करने के लिए काफी अधिकार दिए गए हैं।
अदालत ने कहा कि आधिकारिक ज्ञापन (ओएम) के अनुसार, एलओसी तब तक लागू रहता है जब तक कि आव्रजन ब्यूरो को इसकी शुरुआत करने वाले से हटाने का अनुरोध प्राप्त नहीं होता और किसी भी एलओसी को अपने आप हटाया नहीं जाता।
अदालत ने कहा कि एक प्रावधान है कि मूल एजेंसी को तिमाही या वार्षिक आधार पर एलओसी की समीक्षा करनी होगी और इसे हटाने के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत करना होगा, लेकिन अफसोस की बात है कि यह ज्यादातर मामलों में अनुपस्थित पाया गया है। अदालत ने कहा, ‘‘यह व्यक्ति के देश में और बाहर मुक्त आवाजाही के अधिकार पर खतरनाक असर डालता है।’’
याचिकाकर्ताओं ने व्यवसाय के विस्तार के लिए 11 बैंकों के एक संघ से ऋण प्राप्त किया था। अदालत ने यह उल्लेख किया कि याचिकाकर्ताओं ने दो बैंक तथा उस बैंक को छोड़कर सभी बैंकों के दावों का निपटारा कर दिया है जिसके इशारे पर एलओसी जारी किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने अन्य दो बैंकों को भी एकमुश्त निपटान का प्रस्ताव दिया है जो विचाराधीन है।
दंपति ने अपने बेटे की शैक्षणिक जरूरतों के कारण ब्रिटेन की यात्रा करने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर दावा किया कि उन्हें एक विमान से उतार दिया गया था।
याचिका पर नौ जून को फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि बैंक के पास याचिकाकर्ताओं की देश के बाहर यात्रा में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं हो सकता है। अदालत ने निर्देश दिया कि बैंक और आव्रजन प्राधिकार सहित अन्य प्रतिवादी, याचिकाकर्ताओं को भारत से बाहर यात्रा करने से रोकने के लिए एलओसी को जारी नहीं रखेंगे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)