विदेश की खबरें | सलमान रुश्दी पर चाकू से हमला करने के आरोपी के मुकदमे में अंतिम जिरह शुरू

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. हादी मतार (27) चौटाउक्वा संस्थान के पास रुश्दी पर हमले के आरोप में पश्चिमी न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा काउंटी न्यायालय में मुकदमे का सामना कर रहा है। इस हमले में 77 वर्षीय रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई और उन्हें कई गंभीर चोटें आई थीं।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

हादी मतार (27) चौटाउक्वा संस्थान के पास रुश्दी पर हमले के आरोप में पश्चिमी न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा काउंटी न्यायालय में मुकदमे का सामना कर रहा है। इस हमले में 77 वर्षीय रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई और उन्हें कई गंभीर चोटें आई थीं।

सहायक लोक अभियोजक एंड्रयू ब्रॉटिगन ने जूरी को बताया कि अभियोजक यह साबित नहीं कर पाए हैं कि मतार का इरादा रुश्दी को मारने का था।

ब्रॉटिगन ने कहा, “आप इस बात से सहमत होंगे कि रुश्दी के साथ कुछ बुरा हुआ था, लेकिन आप नहीं जानते कि मतार का सचेत उद्देश्य क्या था। आपने जो गवाही सुनी है, उससे कुछ और साबित नहीं होता कि यह एक अराजक शोरगुल वाला विस्फोट था, जिससे रुश्दी घायल हुए।”

मतार पर अगस्त 2022 के मामले में हत्या के प्रयास और हमले का आरोप लगाया गया है। अगर वह दोषी पाया जाता है तो उसे 25 साल तक की जेल हो सकती है।

रुश्दी पिछले सप्ताह शुरू हुई गवाही की प्रक्रिया के दौरान मुख्य गवाह थे। बुकर पुरस्कार विजेता लेखक ने अदालत से कहा कि जब एक नकाबपोश अजनबी मंच की ओर दौड़ा और उन पर चाकू से हमला किया तो उन्हें लगा कि उनकी मौत होने वाली है और तभी हमलावर को वहां खड़े लोगों ने पकड़ लिया। रुश्दी ने जूरी सदस्यों को अपनी वह दाहिनी आंख भी दिखाई जिसकी रोशनी हमले के कारण चली गई है। वह आमतौर पर काला चश्मा पहनकर रखते हैं।

अदालत ने एक ‘ट्रॉमा’ सर्जन की भी गवाही सुनी जिसने कहा कि यदि शीघ्र उपचार न किया जाता तो रुश्दी की चोटें घातक हो सकती थीं। इस दौरान एक कानून प्रवर्तन अधिकारी ने कहा कि हिरासत की अवधि के दौरान मतार का रवैया शांत और सहयोगात्मक था। सुनवाई के दौरान घटना का वीडियो भी दिखाया गया।

आरोपी ने अपने बचाव में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया और उसके वकीलों ने बिना किसी गवाह को बुलाए अपनी दलीलें समाप्त कर दीं।

जब ‘चौटाउक्वा काउंटी’ के न्यायाधीश डेविड फोले ने आरोपी हादी मतार (27) से पूछा कि क्या वह कठघरे में खड़े होकर कुछ कहना चाहता है, तो उसने कहा, ‘‘नहीं, मैं नहीं कहना चाहता।’’

मतार को सुनवाई के लिए जब भी अदालत कक्ष में लाया गया तो उसने समाचार चैनलों के कैमरों के सामने कई बार ‘‘फलस्तीन की मुक्ति’’ के नारे लगाए।

मतार के खिलाफ बफेलो में भी एक अन्य मामले में सुनवाई जारी है। इस मामले में उस पर आतंकवादी समूह हिजबुल्ला की मदद के प्रयास के आरोप हैं।

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