जरुरी जानकारी | लक्ष्मी विलास बैंक को 10 तिमाहियों के बाद जनवरी-मार्च तिमाही में 93 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) को वित्त वर्ष 2019-20 की आखिरी तिमाही में 92.86 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। इससे पहले फंसे कर्ज में वृद्धि के चलते बैंक को लगातार 10 तिमाहियों में घाटे का सामना करना पड़ा। बैंक के लाभ में आने की प्रमुख वजह उसके फंसे कर्ज के लिए प्रावधान कम होना रहा।

नयी दिल्ली, 10 जुलाई निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक (एलवीबी) को वित्त वर्ष 2019-20 की आखिरी तिमाही में 92.86 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ है। इससे पहले फंसे कर्ज में वृद्धि के चलते बैंक को लगातार 10 तिमाहियों में घाटे का सामना करना पड़ा। बैंक के लाभ में आने की प्रमुख वजह उसके फंसे कर्ज के लिए प्रावधान कम होना रहा।

बैंक ने शुक्रवार को अपने वित्त वर्ष 2019-20 के वार्षिक और जनवरी-मार्च के तिमाही आंकड़े की जानकारी शेयर बाजार को दी।

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इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 की इसी तिमाही में बैंक को 264.43 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। जबकि 2019-20 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में भी बैंक का घाटा 334.48 करोड़ रुपये रहा था।

हालांकि, समीक्षाधीन अवधि में बैंक की आय घटकर 629.76 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 739.73 करोड़ रुपये था।

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इस दौरान बैंक का सकल फंसा कर्ज (एनपीए) उसके सकल ऋण का 25.39 प्रतिशत रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 15.30 प्रतिशत था।

मूल्य के आधार पर बैंक का सकल एनपीए 4,233.31 करोड़ रुपये रहा, जबकि 31 मार्च 2019 को समाप्त हुई तिमाही में यह 3,358.99 करोड़ रुपये था।

इस अवधि में बैंक का शुद्ध एनपीए उसके शुद्ध ऋण का 10.04 प्रतिशत (1,387.86 करोड़ रुपये) रहा। इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 7.49 प्रतिशत (1,506.29 करोड़ रुपये) था।

बैंक के शुद्ध एनपीए में शुद्ध ऋण के अनुपात में वृद्धि होने के बावजूद बैंक का फंसे कर्ज के लिए प्रावधान घटकर 303.47 करोड़ रुपये रहा। जबकि 2018-19 की जनवरी-मार्च तिमाहीं में प्रावधान 478.77 करोड़ रुपये था।

पूरे वित्त वर्ष 2019-20 में बैंक को 836.04 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यह इससे पिछले वित्त वर्ष 2018-19 के 894.09 करोड़ रुपये के घाटे से मामूली कम है।

इस दौरान बैंक की कुल आय घटकर 2,558.03 करोड़ रुपये रही। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 3,090.21 करोड़ रुपये रही। बैंक को अपनी माली हालत सुधारने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सितंबर के बाद से उसकी जमा में लगातार कमी आ रही है।

बैंक पिछली 10 तिमाहियों से घाटे में चल रहा है जिसके चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने सितंबर 2019 में उसे ‘त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई’ वाले बैंकों की सूची में डाल दिया था। इस सूची में डाले जाने वाले बैंकों को अतिरिक्त पूंजी उठाने, कॉरपोरेट को ऋण देने से जुड़े प्रतिबंध का सामना करना पड़ता है। साथ ही अपने एनपीए को कम करने और प्रावधान-जमा अनुपात को 70 प्रतिशत तक लाने के लिए कदम उठाने होते हैं।

शरद

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