जरुरी जानकारी | श्रमबल की कमी, जटिल अनुपालन से प्रभावित हो रही है भारत की पेटेंट प्रणाली : रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. भारत में पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रणाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में देरी की प्रमुख वजह श्रमबल की कमी और जटिल अनुपालन जरूरतें हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

नयी दिल्ली, 19 अगस्त भारत में पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रणाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में देरी की प्रमुख वजह श्रमबल की कमी और जटिल अनुपालन जरूरतें हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) की एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।

‘भारत को तत्काल अपने पेटेंट परिवेश में निवेश करने की क्यों जरूरत है?’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हाल के बरसों में दाखिल किए गए पेटेंट और मंजूर किए गए पेटेंट की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है, लेकिन यदि अमेरिका और चीन जैसे देशों से तुलना की जाए, तो यह संख्या काफी कम है।

इसमें कहा गया है, ‘‘पेटेंट और ट्रेडमार्क प्रणाली से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए सबसे पहले पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क्स महानियंत्रक कार्यालय में श्रमबल बढ़ाने की जरूरत है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च, 2022 के अंत तक भारत में पेटेंट कार्यालय में सिर्फ 860 लोग कार्यरत थे। इनमें परीक्षक और नियंत्रक दोनों शामिल हैं।

वहीं चीन में पेटेंट कार्यालय में कार्यरत लोगों की संख्या 13,704 और अमेरिका में 8,132 थी।

इसमें कहा गया है कि चीन और अमेरिका में एक पेटेंट आवेदन का निपटारा करने में औसतन 20-21 महीने लगते हैं। यह भारत की तुलना में एक-तिहाई है। नियंत्रक के स्तर पर 31 मार्च, 2022 तक 1.64 लाख आवेदन लंबित थे।

संजीव सान्याल और आकांक्षा अरोड़ा द्वारा लिखी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि पेटेंट कार्यालय में कर्मचारियों की संख्या को अगले दो साल में 860 से बढ़ाकर 2,800 करने की जरूरत है।

इसमें कहा गया है कि भारत में किसी पेटेंट आवेदन पर आपत्ति देने के लिए कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है। इस वजह से भी देरी होती है।

रिपोर्ट कहती है कि कुछ जटिल प्रक्रियाएं हैं। मसलन विदेशी पेटेंट आवेदनों के प्रसंस्करण से संबंधित सूचनाएं देने की भी जरूरत होती है। हालांकि, अब पीसीटी (पेटेंट सहयोग समझौता) आवेदनों के मामले में यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि भारत विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के खोज एवं परीक्षण की केंद्रीकृत पहुंच का सदस्य हैं। इसमें अन्य देशों से संबंधित पीसीटी आवेदनों की सूचनाएं पहले से मौजूद रहती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पेटेंट आवेदन दाखिल करने की संख्या में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। 2016-17 में 45,444 पेटेंट आवेदन दाखिल किए गए थे, जिसकी संख्या 2021-22 में 66,440 हो गई। वहीं इस अवधि में भारत में पेटेंट देने का आंकड़ा 9,847 से बढ़कर 30,074 हो गया।

इसके बावजूद चीन और अमेरिका से भारत काफी पीछे है। 2020 में भारत में 56,771 पेटेंट दाखिल किए गए। यह चीन में दाखिल 14.97 लाख पेटेंट आवेदनों का मात्र चार प्रतिशत है। वहीं अमेरिका में दाखिल 5.97 लाख आवेदनों की तुलना में यह मात्र 9.5 प्रतिशत है।

इस दौरान भारत में 26,361 पेटेंट को मंजूरी दी गई। वहीं चीन में 5.3 लाख और अमेरिका में 3.5 लाख पेटेंट को मंजूरी मिली।

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