ताजा खबरें | श्रम चर्चा चार अंतिम रास

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि पूंजी के पैरोकार तो बहुत हैं लेकिन श्रम के पक्ष में बोलने वाले अब कम रह गए हैं और संसद में भी यह नजारा देखने को मिलता है क्योंकि एक समय था जब सदन में श्रम आंदोलन से निकले नेताओं की एक बड़ी तादाद हुआ करती थी लेकिन आज वह विलुप्त प्राय से हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि पूंजी के पैरोकार तो बहुत हैं लेकिन श्रम के पक्ष में बोलने वाले अब कम रह गए हैं और संसद में भी यह नजारा देखने को मिलता है क्योंकि एक समय था जब सदन में श्रम आंदोलन से निकले नेताओं की एक बड़ी तादाद हुआ करती थी लेकिन आज वह विलुप्त प्राय से हो गए हैं।

राजद सदस्य ने कहा कि बेरोजगारी आज सामूहिक चिंता का विषय बन गया है इसके बावजूद यह सरकार की प्राथमिकता में नहीं है और ना ही सरकार इसके प्रति संवेदनशील है।

उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) के निजीकरण के लिए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि कभी भाजपा जब विपक्ष में हुआ करती थी तो इसका पुरजोर विरोध किया करती थी लेकिन आज वह इसकी वकालत करते नहीं थकती।

उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को निजीकरण के लिए रूपरेखा तैयार करनी चाहिए।

उन्होंने महात्मा गांधी रोजगार गारंटी कानून के तहत भत्ता बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के लिए लंबित न्यूनतम मेहनताना आरंभ करने की मांग की।

शिव सेना के अनिल देसाई ने कहा कि आजादी के 75 सालों के बाद भी असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को संगठित करने के लिए ठोस प्रयास नहीं किया गया जबकि देश के सकल घरेलू उत्पाद में इनकी भूमिका बेहद अहम है।

उन्होंने पुरानी पेशन योजना को फिर से बहाल करने की भी मांग की।

भाजपा के राम चंद्र जांगड़ा ने कहा कि मोदी सरकार ने श्रमिकों के नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी की राह पर चलते हुए श्रमिकों की भलाई के लिए बहुत सारे काम किए हैं। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने श्रमिकों के कौशल विकास पर जोर दिया और नयी शिक्षा नीति लाकर छात्रों को व्यवासायिक प्रशिक्षण देने की शुरुआत की है।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियां श्रमिकों को आत्मनिर्भरता की ओर लेकर जाने वाली है।

कांग्रेस के प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा कि श्रम मंत्रालय देश के सबसे पुराने मंत्रालयों में शुमार है लेकिन यह सरकार देश के श्रमिकों की शक्ति को कमजोर कर रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया और श्रम पोर्टलों से कृषि श्रमिकों का कोई भला नहीं होने वाला है क्योंकि उनके लिए प्रति दिन मिलने वाले पैसे अहम हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की व्यवस्था होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लाए गए नए श्रम सुधार से श्रमिकों का नहीं बल्कि प्रबंधन का विकास होगा। उन्होंने सरकार से पूछा कि वह आंकड़े प्रस्तुत करे कि कितने कर्मचारियों को आज प्रोविडेंट फंड मिल रहा है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण ने बंधुआ मजदूरों का मुद्दा उठाया और कहा कि आजादी के इतने सालों बाद भी इनके आंकड़े ना होना शर्म की बात है।

उन्होंने हाथ से मैला ढोने वालों का भी उल्लेख किया और कहा कि आए दिन अखबारों में उनकी मौत की खबरें आती रहती है लेकिन सरकार संसद में बताती है कि एक भी ऐसी मौत नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के राष्ट्रीय आयोग के आंकड़े बताते हैं कि हर पांच से छह दिन में एक सफाई कर्मी की काम के दौरान मौत होती है।

चव्हाण ने कामकाजी महिलाओं के लिए उनके मासिक धर्म के दौरान अवकाश की भी मांग रखी और कहा कि जापान, ताइवान सहित विश्व के कई देशों में ऐसा प्रावधान है।

कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार पूंजीपतियों, बड़े उद्योगपतियों की सरकार है ओर इसीलिए उसे ‘‘सूट-बूट की सरकार’’ भी कहा जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस सरकार के सारे मंत्रालयों के कामकाज को देखें तो यह स्पष्ट भी होता है।’’

उन्होंने भी बड़ी संख्या में पीएसयू को बेचे जाने और उनके निजीकरण के लिए सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि इसकी वजह से नौकरियां खत्म हो रही है और श्रमिक परेशान है।

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने भी सरकार पर उद्योगपतियों के हित में काम करने और श्रमिकों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।

उन्होंने श्रमिकों का शोषण रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने की भी मांग की।

तमिल मनीला कांग्रेस के जी के वासन, इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग के अब्दुल वहाब, तेलुगु देशम पार्टी के कनकमेदला रवींद्र कुमार, जनता दल (यूनाइटेड) के रामनाथ ठाकुर, भाजपा की गीता उर्फ चंद्रप्रभा, रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के रामदास अठावले और भाजपा के ही राम कुमार वर्मा और जय प्रकाश निषाद ने भी चर्चा के दौरान अपनी-अपनी पार्टी का पक्ष रखा।

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