नयी दिल्ली, 12 सितंबर खनन क्षेत्र के दिग्गज अनिल अग्रवाल ने मंगलवार को कहा कि कोनकोला तांबा खदान समूह की भारत में सूचीबद्ध वेदांता लि. को उचित मूल्यांकन पर सौंपी जा सकती है।
पिछले सप्ताह जाम्बिया ने कोनकोला तांबा खदान (केसीएम) वेदांता रिर्सोसेज को लौटाने पर सहमति जतायी। वेदांता रिर्सोसेज, वेदांता लि. की मूल कंपनी है।
जाम्बिया सरकार के पास केसीएम में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी के उत्पादन बढ़ाने और बकाया ऋण चुकाने के लिये 1.2 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने के संकल्प के बाद, जाम्बिया वेदांता को केसीएम खदानों और स्मेल्टर पर नियंत्रण और संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति देने को तैयार हुआ है।
अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, ‘‘आने वाले समय में मेरा विचार है कि हमें संयुक्त अरब अमीरात और भारत में केसीएम और वेदांता लिमिटेड के रिफाइनिंग/स्मेल्टर कारोबार के बीच तालमेल को उच्चतम स्तर पर ले जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि केसीएम की वेदांता रिसोर्सेज के पास वापसी सही समय पर हुई है।
अग्रवाल ने कहा, ‘‘इसमें दुनिया में तांबे और कोबाल्ट का सबसे बड़ा भंडार है। दोनों ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।’’
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