कोलकाता, 17 अक्टूबर कोलकाता मेट्रो ने जहां एक ओर आवागमन को सुगम बनाकर यात्रियों को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर इसका निर्माण कार्य कई लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
निर्माण स्थलों के पास बने मकानों में रह रहे लोग पानी का रिसाव होने और मकानों में दरारें पड़ने जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
मध्य कोलकाता के बऊबाजार में सुलक्षणा आद्या मुखर्जी अपने 150 साल पुराने पुश्तैनी मकान में रहती हैं, लेकिन पूर्व-पश्चिम मेट्रो के सुरंग निर्माण कार्य के दौरान जल के रिसाव के कारण उनके मकान में दरारें पड़ गई है। पिछले तीन साल में इस इलाके में ऐसा तीसरी बार हुआ है।
सुरंग निर्माण कार्य के कारण इलाके में 14 अक्टूबर की सुबह कम से कम 10 मकानों में दरारें पड़ गईं।
अपने 14 वर्षीय बेटे का अकेले पालन-पोषण कर रहीं मुखर्जी ने कहा, ‘‘दीवारों पर, खिड़कियों के पास, सीढ़ियों पर, जमीन और छत में-लगभग सभी जगह दरारें पड़ गई हैं। अब इस मकान में रहना बहुत जोखिम भरा हो गया है, लेकिन मैं अपनी पुश्तैनी सम्पत्ति को छोड़कर कहीं और नहीं जा सकती।’’
पेशे से शिक्षक मुखर्जी के पुराने मकान में उनके संबंधी भी रहते हैं। यह मकान मदन दत्त लेन के निकट है, जहां मेट्रो कार्य के कारण पहले भी दो बार इमारतों को नुकसान हो चुका है।
मुखर्जी ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि मेट्रो प्राधिकारियों ने 2020 में उन्हें तीन दिन के लिए एक होटल में रखा था।
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