देश की खबरें | खडसे ने भाजपा छोड़ने के लिए फडणवीस की 'गंदी राजनीति' को जिम्मेदार ठहराया
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मुंबई : औरंगाबाद, 21 अक्टूबर महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने बुधवार को कहा कि उन्होंने भाजपा छोड़ने और राकांपा में शामिल होने का फैसला किया क्योंकि उन्हें लग रहा था कि जब तक भगवा दल में देवेंद्र फडणवीस हैं, उन्हें "कभी न्याय नहीं मिलेगा।"
उन्होंने फडणवीस पर उनके साथ "गंदी राजनीति" करने का भी आरोप लगाया।
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वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने उनके खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज करायी थी और पुलिस ने फडणवीस के निर्देश पर उस संबंध में मामला दर्ज किया था।
उधर औरंगाबाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए फडणवीस ने यह कहते हुए पलटवार किया कि खडसे सिर्फ "आधा सच" बोल रहे हैं व उन्हें "खलनायक" बना रहे हैं।
इससे पहले राज्य में मंत्री जयंत पाटिल ने बुधवार को घोषणा की कि खडसे शुक्रवार को सत्तारूढ़ राकांपा में शामिल होंगे।
इस घोषणा के बाद खडसे ने एक क्षेत्रीय चैनल से बातचीत में कहा, "मुझे एहसास हुआ कि जब तक फडणवीस भाजपा में हैं, मुझे कभी न्याय नहीं मिलेगा। इसलिए मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया। मैं आगामी दिनों में राकांपा में शामिल हो रहा हूं।"
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे एक पुराने कथित भाषण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया द्वारा मुझ पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया। जब मैंने महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस से पूछा तो उन्होंने कहा कि दमानिया लंबे समय से सांताक्रूज थाने में हंगामा कर रही थी।’’
खड़से ने आरोप लगाया, ‘‘फडणवीस ने स्वीकार किया कि उन्होंने खुद दमानिया के आरोपों के आधार पर स्थानीय पुलिस को मेरे खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा था। मैं मुंबई में नहीं था, फिर भी मेरे खिलाफ वहां प्राथमिकी दर्ज की गयी... मैंने भाजपा के अपने चार दशक के सफर में कभी भी इस तरह की गंदी राजनीति नहीं देखी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं 2014 के विधानसभा चुनावों से पहले विपक्ष का नेता था, तब भाजपा ने 123 सीटें जीती थीं। लेकिन देखिए, 2019 में क्या हुआ। सभी संसाधनों के बावजूद भाजपा फडणवीस के नेतृत्व में 105 सीटें ही जीत सकी। ’’
बारिश प्रभावित औरंगाबाद जिले का दौरा कर रहे फडणवीस ने कहा कि खडसे ने जो कहा, वह केवल आधा-सच है।
उन्होंने कहा, ‘‘"अगर उन्हें मेरे बारे में कोई शिकायत थी, तो उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को इससे अवगत कराना चाहिए था।"
उन्होंने कहा, "लेकिन खडसे का इस्तीफा दुर्भाग्यपूर्ण है। बेहतर होता कि वह इस्तीफा नहीं देते... खडसे ने जो कहा, वह आधा सच है। मैं इसके बारे में आज नहीं बोलूंगा। मैं सही समय पर बोलूंगा।"
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