देश की खबरें | केरल प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने तीन सरकारी विधि कॉलेजों के प्रधानाचार्यों की नियुक्ति रद्द की

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तिरुवनंतपुरम, सात जनवरी केरल प्रशासनिक न्यायाधिकरण (केएटी) ने तीन सरकारी विधि कॉलेज के प्रधानाचार्यों की नियुक्ति रद्द कर दी है। उसने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) नियमन, 2010 के ‘‘प्रावधानों के विपरीत’’ होने के कारण उनकी नियुक्ति रद्द कर दी।

केएटी सदस्य न्यायाधीश पी वी आशा और पी के केशवन ने तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और त्रिशूर गवर्नमेंट लॉ कॉलेज के प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां रद्द कर दी है।

न्यायाधिकरण ने सरकार को यूजीसी नियमों के अनुसार फिर से नियुक्तियां करने का भी निर्देश दिया है।

चार जनवरी को दिए गए आदेश में कहा गया है, ‘‘प्रधानाचार्यों के पद के लिए योग्यता से जुड़े 19 मार्च 2017 के आदेश, 30 अगस्त 2018 की चयन सूची, तीन सितंबर 2018 के पदोन्नति आदेश को रद्द किया जाता है...चयन सूची को यूजीसी नियम, 2010 में शामिल प्रावधानों के विपरीत पाया गया है।’’

यह आदेश एर्नाकुलम लॉ कॉलेज के सहायक प्रोफेसर गिरि शंकर एस एस की उस याचिका पर आया है जिसमें उन्होंने प्रधानाचार्य पद पर नियुक्ति यूजीसी नियमों के अनुसार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

न्यायाधिकरण ने कहा, ‘‘यही उचित होगा कि उन सभी रिक्तियों के लिए नए सिरे से चयन किया जाए...।’’ साथ ही उसने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति के लिए यूजीसी नियमों के अनुसार चयन समिति गठित करने का भी निर्देश दिया।

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि प्रावधानों का पालन किए बगैर प्रधानाचार्यों का चयन किया गया।

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