बेंगलुरु, 12 सितंबर कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु शहर में यातायात की बिगड़ती स्थिति पर एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुझाव दिया कि राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों और विभिन्न उद्योगों तथा कॉर्पोरेट व्यवसायों के समय में संशोधन की संभावना पर विचार करे।
मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की पीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कहा कि उद्योग और श्रम सचिव को उद्योगों, कारखानों, चैंबर ऑफ कॉमर्स और अन्य के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलानी चाहिए तथा कारखानों, वाणिज्यिक उद्यमों और अन्य कार्यस्थलों पर कामकाज के समय को संशोधित करने पर उनकी राय ली जाए।
अदालत ने कहा, ‘‘इसी तरह राज्य सरकार स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा सचिव के माध्यम से हितधारकों की एक बैठक बुला सकती है और स्कूल का समय फिर से तय करने का मुद्दा उठा सकती है, ताकि यातायात का दबाव कम किया जा सके और साथ ही बच्चों की सुरक्षा के पहलू पर भी विचार किया जा सके।’’
समर्पण ट्रस्ट की ओर से 2020 में दायर जनहित याचिका में शहरों में यातायात जाम से बचने के लिए उच्चतम न्यायालय के 2014 के निर्देश को लागू करने की मांग की गई थी।
जनहित याचिका में विशेष रूप से मेखरी सर्कल और यहां बीडीए मुख्यालय के बीच यातायात प्रबंधन की मांग की गई थी।
अदालत ने अधिकारियों को 2023-24 में नम्मा मेट्रो लाइन के विस्तार पर एक परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।
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