देश की खबरें | पद्मश्री अवार्ड पाने वालों में ‘कराटे किड’ डार और पशु चिकित्सक मदान शामिल

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इस साल पद्म श्री सम्मान पाने वालों की फेहरिस्त में कई ‘गुमनाम नायक’ शामिल हैं, जिन्होंने अपने तरीके से सामाज में योगदान दिया। इसमें ‘कराटे किड’ के नाम से लोकप्रिय जम्मू-कश्मीर के फैसल अली डार और दुनिया में पहली बार आईवीएफ तकनीक से भैंस का बछड़ा तैयार करने वाले हरियाणा के पशुचिकित्सक मोती लाल मदान समेत कई नाम शामिल हैं।

नयी दिल्ली, 26 जनवरी इस साल पद्म श्री सम्मान पाने वालों की फेहरिस्त में कई ‘गुमनाम नायक’ शामिल हैं, जिन्होंने अपने तरीके से सामाज में योगदान दिया। इसमें ‘कराटे किड’ के नाम से लोकप्रिय जम्मू-कश्मीर के फैसल अली डार और दुनिया में पहली बार आईवीएफ तकनीक से भैंस का बछड़ा तैयार करने वाले हरियाणा के पशुचिकित्सक मोती लाल मदान समेत कई नाम शामिल हैं।

करनाल के 82 वर्षीय विशेषज्ञ मदान ने इनविट्रो निषेचन (आईवीएफ) तकनीक से दुनिया का पहला भैंस का बछड़ा तैयार करने वाली टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने करनाल में राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के निदेशक के रूप में कार्य किया और प्रजनन एंडोक्रिनोलॉजी, भ्रूण जैव प्रौद्योगिकी, आईवीएफ और क्लोनिंग में अनुसंधान को बढ़ावा दिया।

मरणोपरांत सम्मानित किए गए उत्तर प्रदेश के राधेश्याम खेमका पेशे से प्रकाशक थे और उन्होंने धार्मिक पत्रिका कल्याण का वर्षों तक संपादन किया। वह गीता प्रेस से जुड़े थे जिसने गीता, महाभारत और रामायण जैसी प्राचीन साहित्यिक कृतियों को लोगों तक पहुंचाया।

जम्मू-कश्मीर के फैसल अली डार को कश्मीर का ‘कराटे किड’ कहा जाता है। बांदीपुरा निवासी डार एक मार्शल आर्ट प्रशिक्षक हैं और उन्होंने एक खेल अकादमी की स्थापना करके 4,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया। उनका उद्देश्य संवेदनशील, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को अवसरों और सपनों के साथ सशक्त बनाना है। उनकी उपलब्धि वैश्विक किक बॉक्सिंग चैंपियनशिप में उनके छात्रों द्वारा जीते गए पदकों से परिलक्षित होती है।

आंध्र प्रदेश के नादस्वरम वादक और स्वतंत्रता सेनानी गोसावीदू शेख हसन को पद्म श्री से सम्मानित किया गया। हसन सात दशकों से भगवान राम के लिए ‘सुप्रभातम’ के तौर पर हर दिन अपना हवा से बजने वाला यह वाद्ययंत्र बजाते हैं। उन्होंने अपना जीवन भद्राचलम स्थित ऐतिहासिक श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर की सेवा में समर्पित कर दिया।

उत्तर प्रदेश के सेठ पाल सिंह को कृषि में योगदान के लिए सम्मानित किया गया। सिंह ने सिंघाड़ा की फसल की ज्यामीति और फसल परिवर्तन परिपाटी में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने मचान, रिले क्रॉपिंग और अंतरफसलीय विधि से फसल उगाने की एक नवीन तकनीक विकसित की। उन्होंने किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फल और सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया।

सम्मानित होने वालों में शामिल हिम्मतराव बावस्कर महाड़ महाराष्ट्र के एक सामान्य चिकित्सक हैं, जिन्हें बिच्छू के डंक और सांप के काटने के इलाज के लिए जाना जाता है। उन्होंने संसाधनों की कमी के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों का इलाज शुरू किया और पाया कि इलाज के लिए प्राजोसिन का उपयोग करने से मृत्यु दर 40 प्रतिशत से घटकर एक प्रतिशत से भी कम हो गई।

मरणोपरांत सम्मानित गुरमीत बावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर पंजाबी लोक गायिका हैं। वह दूरदर्शन पर गाने वाली पहली पंजाबी महिला लोक गायिका थीं और उन्होंने इस शैली और इसके वाद्ययंत्रों को लोकप्रिय बनाया। वह 25 से ज्यादा देशों में अपनी गायन कला को पेश कर चुकी थीं।

कर्नाटक में शिवमोग्गा के एक प्रसिद्ध गामाका गायक एचआर केशवमूर्ति हैं, जिन्होंने 100 से अधिक शास्त्रीय रागों को गामाका गायन की अपनी शैली में पेश किया है।

गुजरात की गामित रमीलाबेन रायसिंहभाई तापी की आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से नौ गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया और 300 से अधिक सेनेटरी इकाइयां बनाईं।

मरणोपरांत सम्मानित झारखंड के गिरधारी राम घोंजू के नागपुरी साहित्यकार और शिक्षाविद हैं। रांची के घोंजू ने झारखंड की क्षेत्रीय और संस्कृति के उत्थान के लिए काम किया और 25 से अधिक पुस्तकें तथा नाटक लिखे। विशेष रूप से स्थानीय विरासत और नागपुरी संस्कृति की पहचान को पांच दशकों से अधिक समय तक सहेज कर रखा।

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