खेल की खबरें | जूनियर हॉकी विश्व कप : छह बार का चैम्पियन जर्मनी और अर्जेंटीना सेमीफाइनल में
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Sports at LatestLY हिन्दी. छह बार के चैंपियन जर्मनी ने स्पेन और अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को हराकर बुधवार को यहां एफआईएच जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
भुवनेश्वर, एक दिसंबर छह बार के चैंपियन जर्मनी ने स्पेन और अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को हराकर बुधवार को यहां एफआईएच जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
दिन के पहले क्वार्टर फाइनल में जर्मनी ने स्पेन को शूटआउट में 3-1 से हराया। दोनों टीम निर्धारित समय तक 2-2 से बराबरी पर थी। इसके बाद अर्जेंटीना ने नीदरलैंड को 2-1 से पराजित किया।
जर्मनी ने पांचवें मिनट में क्रिस्टोफर कुटेर के पेनल्टी स्ट्रोक पर किये गए गोल की मदद से बढत बना ली । इसके छह मिनट बाद ही हालांकि स्पेन के इग्नासियो अबाजो ने पेनल्टी कॉर्नर पर बराबरी का गोल किया ।
अगले दो क्वार्टर में कोई गोल नहीं हो सका । स्पेन ने 59वें मिनट में एडुअर्ड डे इग्नासियो सिमो के गोल की मदद से बढत बना ली । आखिरी सीटी बजने पर जर्मनी को पेनल्टी कॉर्नर मिला जिस पर मासी फांट ने गोल करके मैच को शूटआउट में खींच दिया ।
शूटआउट में जर्मनी के लिये पॉल स्मिथ, माइकल स्ट्रथोफ और हानेस म्यूलेर ने गोल दागे जबकि मातेओ पोजारिच चूक गए । वहीं स्पेन के अगाजो, गुइलेरमो फोर्चूनो और सिमो गोल चूक गए जबकि गेरार्ड क्लापेस ने गोल किया ।
जूनियर विश्व कप के इतिहास की सबसे सफल टीम जर्मनी ने छह बार खिताब जीता है । उसने आखिरी बार 2013 में दिल्ली में खिताब जीता था और 2016 में लखनऊ में कांस्य पदक अपने नाम किया था ।
अंतिम आठ के दूसरे मैच में पहले गोल के लिये 24 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। तब 2005 के चैंपियन अर्जेंटीना ने जोकिन क्रूगर के गोल की मदद से बढ़त बनायी।
लेकिन उसकी यह बढ़त एक मिनट भी नहीं रही। नीदरलैंड के मिलेस बकेन्स ने अगले मिनट में ही पेनल्टी कार्नर को गोल में बदलकर मध्यांतर तक स्कोर 1-1 से बराबरी पर रखा।
नीदरलैंड ने दूसरे हाफ में अच्छी शुरुआत की और लगातार चार पेनल्टी कार्नर हासिल किये लेकिन अर्जेंटीना का रक्षण बेहद मजबूत था और उसने ये खतरे आसानी से टाल दिये।
लेकिन नीदरलैंड के तमाम प्रयास तब बेकार साबित हुए जब 59वें मिनट में आत्मघाती गोल करने के कारण उसे हार का सामना करना पड़ा। शेल्डन स्कोटेन ने तब फ्लोरिस मेडनडोर्प का क्रास रोकने के बजाय गोल में भेज दिया था।
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