ताजा खबरें | न्यायाधीश विधेयक चर्चा दो लोस

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के तत्काल बाद किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने अदालतों, विशेषकर उच्च न्यायपालिका में लंबित मामलों का मुद्दा उठाया और कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोलेजियम से सर्वसम्मति से आगे बढ़ाए गए नामों के संदर्भ में सरकार को तीन-चार सप्ताह के भीतर ही नियुक्ति की प्रक्रिया को पूरा करना चाहिए।

बनर्जी ने कहा कि न्यायाधीशों को संसद के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर कोलेजियम अपना काम नहीं करती है जो उसकी क्या जवाबदेही होती है? क्या यह न्याय का मजाक नहीं है?

शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि सीबीआई और ईडी जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है, इसे लेकर क्या कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रतिशोध की भावना से की जाने वाली कार्रवाई के कारण ही न्यायिक व्यवस्था से विश्वास उठता है और जब न्यायपालिका से विश्वास उठता है तो लोकतंत्र को चोट पहुंचती है।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की वांगा गीता विश्वनाथन ने कहा कि कोलेजियम की व्यवस्था को हटाकर राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग जैसी संस्था बननी चाहिए ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया में ज्यादा पारदर्शिता आ सके।

जनता दल (यूनाइटेड) ने कोलेजियम की व्यवस्था पर सवाल किया और कहा कि इसे बदला जाना चाहिए।

बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने इस विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल खड़े किए और कहा कि सरकार को इस बारे में पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग विधेयक लाना चाहिए।

बसपा के श्याम सिंह यादव ने कहा कि प्रयास किया जाना चाहिए कि न्यायपालिका पर अंगुली नहीं उठे। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मोहम्मद फैजल ने कहा कि सरकार को लंबित मामलों में त्वरित निस्तारण के लिए जरूरी कदम उठाना चाहिए।

जारी हक दीपक वैभव

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