देश की खबरें | जेएलएफ : भारत .पाकिस्तान विभाजन एक सच्चाई है, अखंड भारत असंभव : राजनयिक सूरी

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जयपुर, 20 जनवरी राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला और पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी ने भारत और पाकिस्तान बंटवारे को इतिहास की कड़वी सच्चाई बताने के साथ ही जयपुर साहित्य उत्सव (जेएलएफ) में कहा कि दोनों देशों की जनता के बीच आपसी संबंध बेहद शानदार हैं और इससे उम्मीद की एक किरण भी नजर आती है लेकिन अखंड भारत असंभव है।

शुक्ला ने यहां 16वें जेएलएफ में अपनी किताब 'स्कार्स आफ 1947: रीयल पार्टिशन स्टोरीज' पर एक सत्र में पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के साथ परिचर्चा में कहा कि दोनों देशों के बीच जहां तक सुलह समझौते की बात है तो दोनों देशों की जनता के बीच संबंध शानदार हैं, कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि समस्या राजनयिक स्तर पर आती है, सरकारों के स्तर पर आती है जो कि नहीं चाहते कि दोनों देशों के बीच संबंध मैत्रीपूर्ण रहें।

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य शुक्ला ने कहा, ‘‘दोनों देशों के लोगों के बीच संबंध बहुत शानदार हैं, आप वहां जाएं, वो आपको गले लगाएंगे, ऐसी शानदार मेहमानवाजी करेंगे कि आप कल्पना नहीं कर सकते। लेकिन राजनयिक, सरकार, सेना के स्तर पर समस्या है। कुछ गैर सरकारी संगठन दोनों देशों के लोगों को आपस में जोड़ने की दिशा में काम कर रहे हैं। बुजुर्गों को उनके जन्मस्थान, शहर घर दिखाने के लिए सीमा के आर-पार लेकर जाते रहे हैं।''

उन्होंने कहा, ''कुछ तो कोशिश हो रही है। जब तक लोगों से लोगों के बीच यह कोशिश जारी है तो उम्मीद की एक किरण बची है कि संबंध बेहतर हो सकते हैं। लेकिन ये कहना कि अखंड भारत, तो यह असंभव है। इसे नहीं किया जा सकता।''

कलाकार, लेखिका और मौखिक इतिहासकार आंचल मल्होत्रा के इस सवाल पर कि विभाजन के जख्मों को कुरेदते रहना 75 साल बाद क्या मायने रखता है, शुक्ला ने कहा कि दोनों ओर की नई पीढ़ी अनजान है, दूसरी, तीसरी पीढ़ी की भी स्मृतियां धुंधला गई हैं, लेकिन एक नेता और खेल प्रशासक होने के नाते उनका पाकिस्तान में काफी आना जाना रहा और वहां के लोगों से काफी करीब से उन जख्मों को देखने समझने का मौका मिला।

उन्होंने एक किस्सा सुनाया कि किस प्रकार एक विद्वान तैमूर उन्हें अपने घर लेकर गए और वहां उनकी नानी से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने काफी भावुक घटना साझा करते हुए बताया कि 89 साल की तैमूर की नानी ने बांबे की मिट्टी लाने को कहा क्योंकि उनकी इच्छा थी कि वह मरने से पहले बांबे की मिट्टी माथे से लगायें। उन्होंने कहा कि बांबे की प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी परिवार से ताल्लुक रखने वाली तैमूर की नानी 1946 में शादी के बाद पेशावर आ बसी थीं और कभी उसके बाद बांबे नहीं जा सकीं।

इसी घटना का दिलचस्प किस्सा कुछ यूं खत्म हुआ कि राजीव शुक्ला ने मिट्टी के साथ ही एक छोटा तिरंगा भी तैमूर की नानी के लिए भिजवाया और उसके बाद जब भी भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच होता था तो तैमूर का पूरा परिवार पाकिस्तानी टीम के जीतने की मन्नत मांगता था लेकिन तैमूर साहब की नानी टीवी के आगे हाथ में भारतीय तिरंगा पकड़ कर उसे फहराती रहती थीं।

शुक्ला ने कहा, '' पीढ़ियों को इसलिए इसे जानने की जरूरत है ताकि कोई विभाजन फिर से न हो, वैसा नरसंहार भविष्य में कभी न हो जिसमें 20 लाख लोग मारे गए और 40 लाख लोग विस्थापित हुए। संदेश यह है कि ऐसी जघन्यता, ऐसी बर्बरता भविष्य में नहीं दोहराई जानी चाहिए। इसीलिए इसे बार-बार बताना जरूरी है।''

प्रसिद्ध पंजाबी उपन्यासकार और कवि नानक सिंह के पौत्र नवदीप सूरी ने कहा, '' संबंधों को सुधारने की जिम्मेदारी पाकिस्तान की है। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि उसकी आवाम की भलाई और उसकी तरक्की भारत के साथ संबंधों की बेहतरी में है।''

उन्होंने कहा, '' इसमें भारत की कोई भूमिका नहीं है। भारत पाकिस्तान पर शांति थोप नहीं सकता। उसे समझना होगा कि उसके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। उसे भीतर से बदलाव करना होगा, या वक्त ये बदलाव लेकर आएगा लेकिन ये कैसे होगा, कब होगा, कहना मुश्किल है।''

विभाजन के लिए ब्रिटिश शासन को जिम्मेदार ठहराए जाने के विमर्श पर सवाल उठाते हुए सूरी ने कहा, ‘‘हिंदुस्तानी उन्हें दो सौ साल से जानते थे, हमें पता था कि वे इतने सालों से बांटो और राज करो की नीति पर चल रहे हैं। लेकिन हमें क्या हो गया था? हमारी बुद्धि क्यों फिर गई थी?’’

सूरी ने कहा, '' विभाजन एक वास्तविकता है, दोनों देशों : पाकिस्तान और बांग्लादेश: के साथ हमारे संबंध अलग हैं। बांग्लादेश के साथ गर्मजोशी है तो पाकिस्तान के साथ संबंधों पर बर्फ जमी है।''

उन्होंने कहा, ''हमें इस सच को देखना होगा। कई बार ये सुनने में रोचक लगता है कि राजनीतिक मंचों से अखंड भारत के बारे में आवाज उठाई जाती है, जरूरत पड़ी तो बलपूर्वक ऐसा करने की बात कही जाती है, .... कुछ समय पहले लंदन में इस किताब पर चर्चा हुई थी और वहां सिखों के एक समूह ने इसी प्रकार की पुन: एकीकरण की बात कही लेकिन वह भावनात्मक अधिक था।''

सूरी ने कहा, ''मेरे पास इसका जवाब नहीं है। मैं केवल यही कह सकता हूं कि अग्रिम पंक्ति पर होने के कारण पंजाब के लोगों ने हर युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान झेला है। लेकिन वे इस त्रासदी को भूल कर आगे बढ़ना चाहते हैं। ''

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