कुरुक्षेत्र (हरियाणा), आठ जून जननायक जनता पार्टी (जजपा) के विधायक राम करण काला ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह सूरजमुखी के बीजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग के साथ कुछ दिन पहले एक राजमार्ग को अवरुद्ध करने वाले किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में हरियाणा शुगरफेड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं।
काला की पार्टी हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सत्तारूढ़ गठबंधन में साझेदार है। उन्होंने कहा कि उनका अपने शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के किसानों से पुराना नाता रहा है और पुलिस की कार्रवाई खुद उन पर हमले जैसी थी।
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी के नेतृत्व में किसानों ने मंगलवार को शाहाबाद के पास राष्ट्रीय राजमार्ग को छह घंटे से अधिक समय तक जाम रखा था और सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सूरजमुखी के बीज खरीदने की मांग की थी।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज किया।
बाद में बीकेयू (चढूनी) के अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी समेत नौ नेताओं को दंगा भड़काने तथा गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने समेत अनेक आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया।
शाहाबाद में बृहस्पतिवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए काला ने कहा कि वह हरियाणा राज्य सहकारी चीनी मिल संघ लिमिटेड (शुगरफेड) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं, क्योंकि किसी संघ के अध्यक्ष पद पर बने रहने के बजाय उनका किसानों से नाता अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने यह मांग भी की कि सभी गिरफ्तार किसानों को तत्काल रिहा किया जाए।
जजपा विधायक ने कहा कि उन्होंने तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर सूरजमुखी के बीजों की खरीद समेत किसानों के लंबित मुद्दों को सुलझाने का अनुरोध किया था।
काला ने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने हमेशा कहा कि इस मुद्दे के समाधान के लिए एक समिति बनाई गयी है।’’
उन्होंने कहा कि वह प्रदर्शनकारी किसानों को सड़क जाम करने से रोक लेते, लेकिन मुख्यमंत्री ने हालात से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई को प्राथमिकता दी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)











QuickLY