देश की खबरें | झारखंड: सरना धर्म संहिता को मान्यता देने की मांग को लेकर सत्तारूढ़ झामुमो ने किया धरना

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रांची/मेदिनीनगर (झारखंड), 27 मई सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरना धर्म संहिता को मान्यता देने की मांग को लेकर राज्य भर के जिला समाहरणालयों पर मंगलवार को प्रदर्शन किया।

पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरना धर्म संहिता को आगामी जनगणना के सातवें कॉलम में शामिल नहीं किया गया, तो झामुमो राज्य में जनगणना नहीं होने देगी।

उन्होंने दावा किया कि जनगणना में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध धर्मों के लोगों के लिए कॉलम हैं, लेकिन देश में बड़ी आबादी होने के बावजूद आदिवासी लोगों के लिए कोई अलग कॉलम नहीं है।

राज्य की राजधानी रांची में पार्टी कार्यकर्ता राजभवन के पास एकत्र हुए और कचहरी स्थित जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) की ओर मार्च किया।

यहां प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने आरोप लगाया कि भाजपा सरना धर्म संहिता को लागू नहीं करना चाहती, जो आदिवासियों की लंबे समय से लंबित मांग रही है।

उन्होंने कहा कि झारखंड विधानसभा ने 2020 की जनगणना में सरना को अलग धर्म के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र को भेजा था।

पांडेय ने कहा, "लगभग पांच साल हो गए हैं, लेकिन यह अब भी लंबित है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने इस संबंध में कोई पहल नहीं की है। लेकिन झामुमो कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया है कि जब तक सरना धर्म संहिता को मान्यता नहीं मिल जाती, वे जनगणना नहीं होने देंगे।"

इसी तरह के प्रदर्शन साहेबगंज, देवघर, गिरिडीह, धनबाद, जमशेदपुर और खूंटी सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुए।

हालांकि, भाजपा अध्यक्ष और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस और झामुमो पर सरना धर्म संहिता के नाम पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

मरांडी ने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "सरना संहिता से ज्यादा महत्वपूर्ण सरना धर्म और संस्कृति की रक्षा करना है। अगर कांग्रेस और झामुमो को सरना आदिवासियों की चिंता है, तो उन्हें आधे-अधूरे मन से काम नहीं करना चाहिए।"

साल 2011 की जनगणना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की कुल आबादी 3,29,88,134 है, जिसमें 86,45,042 आदिवासी (26.20 प्रतिशत) हैं।

उन्होंने कहा, "इनमें से 14,18,608 ईसाई हैं, यानी कुल आदिवासी आबादी के 15.48 प्रतिशत लोगों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। अगर आदिवासी अपने धर्म और संस्कृति से दूर होते रहेंगे, तो सरना धर्म संहिता कौन भरेगा?"

इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुबर दास ने कांग्रेस पर सरना को अलग धर्म संहिता के रूप में मान्यता नहीं देने का आरोप लगाया।

दास ने पलामू में पत्रकारों से कहा, "पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव के शासनकाल में हमारी पार्टी ने सरना धर्म के लिए अलग कॉलम बनाने का मुद्दा उठाया था, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।"

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