देश की खबरें | रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध की घोषणा शब्दजाल, आत्मनिर्भर भारत महज एक नारा:कांग्रेस
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नयी दिल्ली, नौ अगस्त कांग्रेस ने रक्षा उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध की रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की घोषणा को तवज्जो नहीं देते हुए रविवार को कहा कि यह सिर्फ शब्दजाल है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ महज एक नारा है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने आत्मनिर्भर भारत बनने की दिशा में (सैन्य उपकरणों के) आयात पर प्रतिबंधों को एक महत्वपूर्ण कदम बताने को लेकर भी सिंह की आलोचना करते हुए कहा कि ‘दावों और हकीकत में बड़ा अंतर है। ’
सिंघवी ने ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) ने आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया, लेकिन यह नहीं कहा कि कब, कैसे और क्या इसकी दिशा होगी। महज एक नारा दे दिया गया क्योंकि यह सरकार और प्रधानमंत्री नारों के शौक़ीन हैं। ’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि रक्षा मंत्री ने रविवार सुबह एक धमाका करने का वादा किया, लेकिन यह फुस्स हो गया।
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पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘रक्षा उपकरणों का एक मात्र आयातक रक्षा मंत्रालय है। आयात पर कोई भी प्रतिबंध असल में उसी पर प्रतिबंध होगा। ’’
चिदंबरम ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा कि रक्षा मंत्री ने रविवार की अपनी ऐतिहासिक घोषणा में जो कुछ कहा, वह मंत्री द्वारा अपने सचिवों से एक आधिकारिक आदेश के तहत कहे जाने लायक मात्र था।
उन्होंने कहा, ‘‘आयात पर प्रतिबंध केवल शब्दजाल है। इसका अर्थ यह है कि हम दो से चार साल में उन्हीं उपकरणों (जिन्हें हम आज आयात करते हैं) को बनाने की कोशिश करेंगे और इसके बाद आयात बंद करेंगे।’’
एक सवाल के जवाब में सिंघवी ने कहा कि रक्षा मंत्री का बयान ‘‘मजेदार और दुर्भाग्यपूर्ण’’ दोनों है।
उन्होंने कहा, ‘‘इन रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक कौन है? यह रक्षा मंत्रालय के विभाग हैं। इसलिए रक्षा मंत्रालय अपना आयात घटाएगा। दूसरी बात यह कि आयात घटाने में तीन-चार साल का वक्त लगेगा। ’’
उन्होंने कहा कि इसके बजाय देश को निजी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करनी चाहिए। रक्षा मंत्रालय जब चाहे अपना आयात घटा सकता है।
उल्लेखनीय है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घरेलू रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 101 हथियारों और सैन्य उपकरणों के आयात पर 2024 तक के लिए रोक लगाने की रविवार सुबह घोषणा की। इन उपकरणों में हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मालवाहक विमान, पारंपरिक पनडुब्बियां और क्रूज मिसाइल शामिल हैं।
सिंह ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए अनुमान लगाया कि इन निर्णय से अगले पांच से सात साल में घरेलू रक्षा उद्योग को करीब चार लाख करोड़ रुपये के ठेके मिलेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ आह्वान को आगे बढ़ाते हुए घरेलू रक्षा विनिर्माण को तेज करने के लिये अब बड़े कदम उठाने को तैयार है।
अधिकारियों के अनुसार, 101 वस्तुओं की सूची में टोएड आर्टिलरी बंदूकें, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, अपतटीय गश्ती जहाज, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत, फ्लोटिंग डॉक, पनडुब्बी रोधी रॉकेट लांचर और कम दूरी के समुद्री टोही विमान शामिल हैं।
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