देश की खबरें | जम्मू कश्मीर :भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 250 करोड़ रूपये के रिण घोटाले में आरोप पत्र दायर किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू कश्मीर में दो साल पहले एक अस्तित्वहीन सहकारी आवासीय समिति को 250 करोड़ रुपये का रिण मंजूर करने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है । इनमें जम्मू कश्मीर सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हैं ।
श्रीनगर/जम्मू, 11 अगस्त जम्मू कश्मीर में दो साल पहले एक अस्तित्वहीन सहकारी आवासीय समिति को 250 करोड़ रुपये का रिण मंजूर करने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने तीन लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है । इनमें जम्मू कश्मीर सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष भी शामिल हैं ।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के प्रवक्ता ने यहां बताया, ‘‘भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जम्मू कश्मीर राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (जेकेएसटीसीबी) के तत्कालीन अध्यक्ष मोहम्मद शफी डार तथा दो अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है । इनमें रिवर झेलम कोआपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के अध्यक्ष हिलाल अहमद मीर तथा सचिव अब्दुल हमीद हजाम शामिल हैं । उस हाउसिंग सोसाइटी का कोई अस्तित्व ही नहीं था ।'
ब्यूरो ने डार एवं अन्य के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अधीन मामला दर्ज किया था । श्रीनगर के शिवपुरा इलाके में एक उपनगरीय टाउनशिप के निर्माण के उद्देश्य से बैंक की रिण नीति को दरकिनार करते हुये झूठे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एक अस्तित्वहीन हाउसिंग सोसाइटी को 250 करोड़ रुपये का रिण निर्गत करने के आरोप में यह मामला दर्ज किया गया था ।
ब्यूरो की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि डार, मीर हजाम तथा जम्मू कश्मीर कोआपरेटिव सोसाइटी के रजिस्ट्रार मोहम्मद मुजीब उर रहमान घासी तथा उप रजिस्ट्रार सैयद आशिक हुसैन एवं अन्य के बीच साजिश रची गयी । इसका मकसद 2018-19 में एक फर्जी सोसाइटी बनाना था ताकि बैंक से कर्ज की राशि प्राप्त की जा सके ।
प्रवक्ता ने बताया कि साजिश रची गयी, और आरोपियों ने सोसाइटी का एक फर्जी पंजीकरण पमाण पत्र बनवाया ।
उन्होंने बताया कि मीर ने 10 जनवरी 2018 को एक आवेदन के माध्यम से राज्य सरकार के सहकारी विभाग के सचिव अब्दुल माजीद भट से संपर्क किया। आवेदन में जम्मू-कश्मीर सहकारी विभाग से जम्मू-कश्मीर राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड श्रीनगर को उपनगरीय टाउनशिप के निर्माण के वास्ते 300 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता (अग्रिम ऋण) के अनुदान के लिए निर्देश देने का आग्रह किया गया था ।
उन्होंने बताया कि मीर के आवेदन को मंजूरी दे दी गयी और घासी ने इसे श्रीनगर स्थित सहकारी बैंक के अध्यक्ष को रिण मंजूर करने के लिये भेज दिया ।
प्रवक्ता ने बताया, 'राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष ने साजिश के तहत रिण मांगने वाले हिलाल अहमद को उस काल्पनिक सोसाइटी के पक्ष में 250 करोड़ रुपये का रिण मंजूर कर दिया और उसमें से 233 करोड़ जारी कर दिया ।'
उन्होंने बताया कि जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि सहकारी बैंक के तत्कालीन अध्यक्ष ने फर्जी और गलत दस्तावेजों के आधार पर बैंकिंग नियमों को उल्लंघन करते हुये लोन की मंजूरी दी और इस तरह से सरकार को 233 करोड़ एवं उसके ब्याज का नुकसान हुआ ।
प्रवक्ता ने बताया कि पूरे रिण की राशि मीर के खाते में स्थानांतरित की गयी जहां से आरीटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से 18 अन्य लोगों के खाते में स्थानांतरित किये गये जो शिवपोरा में लगभग 13 हेक्टेयर भूमि के हिस्सेदार / कानूनी उत्तराधिकारी माने जाते हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)