नयी दिल्ली, दो मई एक मुस्लिम संगठन ने सिनेमाघरों और ओवर द टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म पर फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की रिलीज पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को निर्देश देने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने कहा कि पांच मई को रिलीज होने वाली इस फिल्म से देश में 'नफरत' और 'समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी' पैदा होने की संभावना है।
इससे पहले दिन में, न्यायमूर्ति केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने नफरती भाषणों के मामले में दायर एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय के समक्ष अथवा उचित मंच पर अपनी बात रख सकते हैं, क्योंकि फिल्म का प्रमाणन किया जा चुका है।
जमीयत ने अधिवक्ता एजाज मकबूल के माध्यम से दायर अपनी रिट याचिका में कहा है, "फिल्म पूरे मुस्लिम समुदाय को नीचा दिखाती है और इसके परिणामस्वरूप हमारे देश में याचिकाकर्ताओं और पूरे मुस्लिम समुदाय के जीवन तथा आजीविका को खतरा उत्पन्न होगा और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के अंतर्गत प्रदत्त अधिकारों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।"
मुस्लिम संगठन ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग के साथ-साथ यह निर्देश भी देने का अनुरोध किया है कि ट्रेलर को इंटरनेट से हटा दिया जाए; और/या वैकल्पिक रूप से सीबीएफसी को आपत्तिजनक दृश्यों और संवादों की पहचान करने का निर्देश दें ताकि उन्हें 'द केरल स्टोरी' फिल्म से हटाया जा सके।
याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘फिल्म इस विचार को बढ़ावा देती है कि लव जिहाद का इस्तेमाल गैर-मुस्लिम महिलाओं को इस्लाम कबूल कराने और आईएसआईएस में शामिल होने के लिए लुभाने के वास्ते किया जा रहा है।’’
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