नयी दिल्ली, 20 जुलाई उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालय मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के निर्देश को लेकर शनिवार को भी विवाद जारी रहा। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसे ‘‘भेदभावपूर्ण और साम्प्रदायिक’ करार दिया, तो भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने कहा कि मध्य प्रदेश में भी ऐसा कदम उठाया जाना चाहिए।
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने इस आदेश को ‘विभाजनकारी एजेंडा’ बताया और सवाल किया कि क्या यही है 'विकसित भारत' का मार्ग है?
केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस द्वारा कांवड़ यात्रा मार्ग पर फल विक्रेताओं को अपनी दुकानों पर नाम लिखने के लिए कहे जाने में उन्हें ‘‘कुछ भी गलत नहीं’’ लगता है।
मांझी उत्तर प्रदेश पुलिस के उस विवादास्पद निर्देश के बारे में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे, जिसकी विपक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सहित कुछ भाजपा सहयोगियों ने आलोचना की है।
मांझी ने कहा, ‘‘मैं अन्य दलों के संबंध में तो नहीं कह सकता, लेकिन मुझे इस तरह के आदेश में कुछ भी गलत नहीं लगता। अगर कारोबार से जुड़े लोगों से उनके नाम और पते प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए कहा जाए, तो इसमें क्या नुकसान है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘वास्तव में, इस तरह नाम लिखा होने से खरीदारों के लिए पसंदीदा दुकान ढूंढना आसान हो जाता है। इस घटना को धर्म के चश्मे से देखना गलत है।’’
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह ‘‘भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक’’ फैसला है तथा इससे संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का हनन होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि उसकी कानूनी टीम इस आदेश के कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
मदनी ने कहा, ‘‘देश के सभी नागरिकों को संविधान में इस बात की पूरी आजादी दी गई है कि वे जो चाहें पहनें, जो चाहें खाएं, उनकी व्यक्तिगत पसंद में कोई बाधा नहीं डालेगा, क्योंकि यह नागरिकों के मौलिक अधिकार के विषय हैं।’’
मुजफ्फरनगर जिले में 240 किलोमीटर लंबे कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी होटलों, ढाबों और ठेलों सहित भोजनालयों को अपने मालिकों या इन दुकानों पर काम करने वालों के नाम प्रदर्शित करने के आदेश के कुछ दिन बाद शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य के लिए ऐसा ही आदेश जारी करने का फैसला किया। उत्तराखंड सरकार ने भी ऐसा निर्णय लिया है।
उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य सिब्बल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कांवड़ यात्रा मार्ग पर उत्तर प्रदेश में सड़क किनारे लगने वाले ठेलों सहित सभी खाने-पीने की दुकानों को उन पर मालिकों का नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया गया है। क्या यही है 'विकसित भारत' का मार्ग?”
कांग्रेस के पूर्व नेता और निर्दलीय राज्यसभा सदस्य ने कहा, “विभाजनकारी एजेंडा सिर्फ और सिर्फ देश को विभाजित करेगा।”
बाद में उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कांवड़ यात्रा पर जो राजनीति हो रही है, वह भारत को ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में नहीं ले जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और मुख्यमंत्रियों को ऐसे मुद्दे नहीं उठाने चाहिए जिन पर राजनीति हो, जिससे विवाद हो। आम आदमी को इन मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है। इससे विवाद बढ़ेगा, व्यापारियों को नुकसान होगा। फिर ऐसे मुद्दे बाद में संसद में उठाए जाएंगे और आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के मुद्दों पर चर्चा नहीं की जाएगी।’’
कांग्रेस ने शुक्रवार को इस आदेश को ‘शरारत’ और ‘पक्षपात’ करार दिया था।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों को उनके मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का उत्तर प्रदेश सरकार का आदेश संविधान के खिलाफ है, जो सभी को समान अधिकार की गारंटी देता है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भाजपा सरकार द्वारा कांवड़ यात्रा मार्ग पर भोजनालयों को मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का निर्देश देना ‘‘असंवैधानिक’’ है और इसका उद्देश्य सांप्रदायिक ध्रुवीकरण है।
माकपा पोलित ब्यूरो ने एक बयान जारी कर मांग की कि इन आदेशों को रद्द किया जाए।
मध्य प्रदेश में इंदौर-2 विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रमेश मेंदोला ने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर आग्रह किया कि राज्य में सभी दुकानदारों के लिए अपनी दुकानों के बाहर दुकान मालिकों का नाम प्रदर्शित करना अनिवार्य किया जाए।
उन्होंने कहा, “किसी भी व्यक्ति का नाम उसकी पहचान होता है। व्यक्ति को अपने नाम पर गर्व होता है। नाम पूछना ग्राहक का अधिकार है और दुकानदार को अपना नाम बताने में गर्व होना चाहिए, शर्म नहीं।”
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