देश की खबरें | जामिया नगर हिंसा : मौजूदा चरण में निचली अदालत की टिप्पणियां नहीं हटाई जा सकती- उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, 13 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2019 के जामिया नगर हिंसा मामले में छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम और अन्य को आरोप मुक्त करने के निचली अदालत के फैसले में पुलिस के खिलाफ की गई टिप्पणियों को फिलहाल हटाने से इनकार कर दिया। हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि इन टिप्पणियों से आगे की जांच या किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमे पर असर नहीं पड़ेगा।

उच्च न्यायालय ने सोमवार को छात्र कार्यकर्ताओं शरजील इमाम, आसिफ इकबाल तनहा, सफूरा जरगर और अन्य से मामले में उन्हें आरोपमुक्त करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की याचिका पर उनका जवाब मांगा।

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने इस दलील के आधार पर उच्च न्यायालय से निचली अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों को हटाने का आग्रह किया कि मामला ‘‘असहमति के अधिकार’’ से संबंधित नहीं, बल्कि गैरकानूनी जमावड़े के हिंसक होने से संबंधित है। जैन ने कहा, ‘‘अदालत के अवलोकन प्रभावित करने वाले हैं और आगे की किसी भी जांच के लिए नुकसानदेह होंगे।’’

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि मौजूदा चरण में टिप्पणियों को नहीं हटाया जा रहा, लेकिन आदेश दिया, ‘‘जांच एजेंसी के खिलाफ की गई टिप्पणियों से आगे की जांच या किसी भी आरोपी के खिलाफ मुकदमे पर असर नहीं पड़ेगा।’’ मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

निचली अदालत ने 4 फरवरी के अपने आदेश में इमाम और तनहा सहित 11 लोगों को यह कहते हुए आरोपमुक्त कर दिया था कि उन्हें पुलिस द्वारा ‘‘बलि का बकरा’’ बनाया गया था और असहमति को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि दबाया जाना चाहिए।

दिसंबर 2019 में यहां जामिया नगर इलाके में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस के बीच झड़प के बाद भड़की हिंसा के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा है कि निचली अदालत का आदेश कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और इसमें काफी विसंगतियां हैं।

पुलिस की दलील में कहा गया है कि निचली अदालत ने न केवल आरोपी व्यक्तियों को आरोपमुक्त किया, बल्कि ‘‘भावनाओं’’ में बह गई तथा अभियोजन एजेंसी पर आक्षेप लगाया है। पुलिस ने कहा है कि अभियोजन एजेंसी और जांच के खिलाफ ‘‘गंभीर पूर्वाग्रहपूर्ण’’ और ‘‘प्रतिकूल’’ टिप्पणी की गई है।

इमाम पर 13 दिसंबर, 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भड़काऊ भाषण देकर दंगे भड़काने का आरोप लगाया गया था। इमाम जेल में ही रहेंगे, क्योंकि वह 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी हैं।

निचली अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि निश्चित रूप से घटनास्थल पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी थे और भीड़ के भीतर कुछ असामाजिक तत्व व्यवधान तथा तबाही का माहौल बना सकते थे।

निचली अदालत ने 11 आरोपियों को आरोपमुक्त करते हुए एक आरोपी मोहम्मद इलियास के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। जामिया नगर पुलिस थाना ने इमाम, तनहा, सफूरा जरगर, मोहम्मद कासिम, महमूद अनवर, शहजर रजा खान, मोहम्मद अबुजर, मोहम्मद शोएब, उमैर अहमद, बिलाल नदीम, चंदा यादव और मोहम्मद इलियास के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।

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