ताजा खबरें | पूर्वोत्तर के लोगों के मन से अलग-थलग होने की भावना को दूर करना जरूरी : कांग्रेस
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. पूर्वोत्तर क्षेत्र को रणनीतिक नजरिये से देखे जाने का आह्वान करते हुए कांग्रेस के एक सदस्य ने राज्यसभा में सोमवार को मांग की इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत औद्योगिक नीति बनाई जानी चाहिए और ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जिससे वहां के लोगों के मन में घर कर चुकी अलग-थलग होने की भावना को दूर किया जा सके।
नयी दिल्ली, 14 मार्च पूर्वोत्तर क्षेत्र को रणनीतिक नजरिये से देखे जाने का आह्वान करते हुए कांग्रेस के एक सदस्य ने राज्यसभा में सोमवार को मांग की इस क्षेत्र के लिए एक मजबूत औद्योगिक नीति बनाई जानी चाहिए और ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए जिससे वहां के लोगों के मन में घर कर चुकी अलग-थलग होने की भावना को दूर किया जा सके।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र के मंत्रालय के कामकाज पर उच्च सदन में हो रही चर्चा की शुरूआत करते हुए कांग्रेस के रिपुन बोरा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों को विकास की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा ‘‘2001 में पूर्वोत्तर विकास मंत्रालय गठित हुआ। 2002 में मंत्रालय ने काम शुरू किया। संप्रग सरकार ने इस पर पूरा ध्यान दिया।
उन्होंने दावा किया ‘‘डोनर मंत्रालय की वेबसाइट के आंकड़े बहुत कुछ कहते हैं। ’’ उन्होंने आरोप लगाया कि अरुणाचल प्रदेश में फरवरी 2022 तक 126 परियोजनाओं में से 118 परियोजनाओं का कार्यान्वयन पूर्ववर्ती संप्रग सरकार ने किया है। केवल 8 परियोजनाएं ही राजग सरकार ने चलाई हैं। इसी तरह असम के लिए राजग सरकार ने 9 परियोजनाएं चलाईं। अन्य राज्यों का भी यही हाल है। राजग सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों को बीते आठ साल में एक भी बड़ी परियोजना नहीं दी। और तो और गुवाहाटी के गोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निजीकरण कर दिया गया। ’’
उन्होंने कहा ‘‘असम की, सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रम, दो पेपर मिल बंद हैं। सलारी पेपर मिल के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला लंबे समय से। वहां के 15 कर्मचारी आत्महत्या कर चुके हैं। क्या यह आपकी एक्ट ईस्ट नीति है ?’’
बोरा ने कहा ‘‘प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर के दौरे पर जाते हैं तो बड़ी बड़ी बातें करते हैं, लेकिन हकीकत में वहां विकास कितना हुआ है , ये देखा जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा ‘‘पूर्वोत्तर राज्यों ने आजादी के आंदोलन में अहम योगदान दिया है। आज सुरक्षा की दृष्टि से भूटान, नेपाल, चीन, बांग्लादेश से घिरा पूर्वोत्तर क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। यही वजह है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने वहां सड़कों से लेकर हर तरह के विकास पर ध्यान केंद्रित किया। लेकिन 2014 में सत्ता में आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने इस पर पानी फेर दिया।’’
बोरा ने कहा ‘‘रोजगार की जरूरत पूर्वोत्तर के युवाओं को भी है। यहां बड़ी परियोजनाएं दी जानी चाहिए। कई क्षेत्रों में अवसंरचनाओं की जरूरत है चाहि वह खेल हो, अस्पताल हो या शिक्षा हो, इनकी जरूरत है। यह मांगने की नौबत आनी नहीं चाहिए। यह तो अपने आप ही देना चाहिए।’’
उन्होंने कहा ‘‘मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम, मेघालय त्रिपुरा, असम, अरुणाचल प्रदेश के लोगों ने आजादी के लिए बलिदान दिया है। इनकी बड़ी आबादी जंगलों में रहती है। इन्हें सुविधाओं की जरूरत है। आज भी ये लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इन राज्यों के लोगों के साथ सरकार का सौतेला व्यवहार बेहद पीड़ादायक है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि पूर्वोत्तर के लिए बनाए गए डोनर मंत्रालय का पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में कार्यालय ही नहीं है।’’
राज्य को एक मजबूत औद्योगिक नीति की अविलंब जरूरत बताते हुए बोरा ने कहा ‘‘यह आज पूर्वोत्तर क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके साथ ही वहां के लोगों के मन में सरकार के सौतेले व्यवहार की वजह से आई अलग-थलग होने की भावना को भी दूर करना बेहद जरूरी है।’’
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