देश की खबरें | इसरो ने जीएसएलवी मार्क-तीन का नाम बदलकर एलवीएम-3 किया
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नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जियोसिंक्रोनस उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) मार्क-तीन का नाम बदलकर प्रक्षेपण यान मार्क (एलवीएम)-तीन कर दिया है, जो मुख्य रूप से उपग्रहों को विभिन्न कक्षाओं में स्थापित करने के उसके कार्य की पहचान के लिए है।
एलवीएम-तीन रॉकेट का उपयोग भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए भी किया जाएगा, जो 2024 के अंत में संभावित रूप से निर्धारित है और रविवार को वनवेब के 36 उपग्रहों के कक्षाओं में सफलतापूर्वक स्थापित होने के बाद इसरो के वाणिज्यिक प्रक्षेपणों के लिए एक पसंदीदा यान के रूप में भी उभर रहा है।
इसरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘इससे पहले, प्रक्षेपण यान को एक विशिष्ट उद्देश्य के लिए नामित किया जाता था, जैसे कि पीएसएलवी ध्रुवीय उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए या जीएसएलवी भूस्थिर उपग्रहों के लिए।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘रॉकेट अब केवल जियोसिंक्रोनस कक्षा में नहीं जाता है। एक रॉकेट कहीं भी जा सकता है, कहीं भी- जीईओ (जियोसिंक्रोनस अर्थ ऑर्बिट), एमईओ (पृथ्वी की मध्यम कक्षा), एलईओ (पृथ्वी की निम्न कक्षा) जाने के लिए उसकी कोई निश्चित कक्षा नहीं है।’’
रॉकेट का नाम बदलने का निर्णय प्रक्षेपण के लिए चिह्नित कक्षाओं के प्रकार के बारे में भ्रम को दूर करना था। अधिकारी ने कहा, ‘‘जीईओ कक्षा के लिए जीएसएलवी ही कहा जाता रहेगा, लेकिन जीएसएलवी-मार्क तीन का नाम बदलकर एलवीएम-तीन कर दिया गया है। एलवीएम-तीन हर जगह - जीईओ, एमईओ, एलईओ, चंद्रमा, सूर्य के मिशन कि लिए जाएगा।’’
जीएसएलवी मार्क-तीन या एलवीएम-तीन का इस्तेमाल 2019 में चंद्रयान-दो मिशन को चंद्रमा पर लॉन्च करने के लिए किया गया था, जो रॉकेट की पहली परिचालन उड़ान थी। एलवीएम-तीन का इस्तेमाल रविवार को वनवेब के उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने के लिए किया गया और अगले साल भी इसी तरह के मिशन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
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