जरुरी जानकारी | अधिक कॉबर्न उत्सर्जन वाली कंपनियों में निेवेश पर दीर्घावधि में हो सकता है नुकसान:शोध

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. लघु अवधि में अधिक कॉर्बन उत्सर्जन यानी फुटप्रिंट वाली कंपनियों में निवेश पर निवेशकों को अधिक प्रतिफल या रिटर्न मिल सकता है लेकिन दीर्घावधि में निवेशकों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सरकारें ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को लेकर नियमन लागू कर देती हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (आईआईटी-गुवाहाटी) तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलूर (आईआईएम-बेंगलूर) के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है।

नयी दिल्ली, 27 जुलाई लघु अवधि में अधिक कॉर्बन उत्सर्जन यानी फुटप्रिंट वाली कंपनियों में निवेश पर निवेशकों को अधिक प्रतिफल या रिटर्न मिल सकता है लेकिन दीर्घावधि में निवेशकों को नुकसान हो सकता है, क्योंकि सरकारें ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) के उत्सर्जन को लेकर नियमन लागू कर देती हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (आईआईटी-गुवाहाटी) तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान-बेंगलूर (आईआईएम-बेंगलूर) के शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है।

दो शीर्ष संस्थानों की टीमों ने कॉर्बन उत्सर्जन तथा इन कंपनियों में निवेश के संभावित जोखिमों के बीच संबंध स्थापित किया है।

शोधकर्ताओं ने अमेरिकी बाजार में सूचीबद्ध बड़ी कंपनियों में से 200 से अधिक का व्यापक डेटा विश्लेषण किया और इसके निष्कर्ष एआरएक्सआईवी में प्रकाशित किए गए हैं। यह अमेरिका के कॉर्नवेल विश्वविद्यालय की टीम द्वारा तैयार एक शोध साझा करने का मंच है।

कंपनियों के कार्बन उत्सर्जन का आकलन करने के लिए प्रत्यक्ष जीएचजी उत्सर्जन और खरीदे गए जीएचजी उत्सर्जन (बिजली की खपत या गर्मी में) पर विचार किया गया।

तीन सदस्यीय टीम के अनुसार, जैसे कि दुनिया एक स्थायी भविष्य की ओर बढ़ना चाहती है और हर जगह अर्थव्यवस्थाएं अपनी कॉर्बन फुटप्रिंट को कम करने की कोशिश कर रही हैं। ग्रीनहाउस गैसों के अत्यधिक उत्सर्जन पर भरोसा करने वाली कंपनियों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि इनमें से ज्यादातर कंपनियों (71.6 प्रतिशत) ने 2016-19 की अवधि में अपने कार्बन उत्सर्जन में गिरावट दिखाई थी।

आईआईटी-गुवाहाटी के प्रोफेसर प्रतिम चक्रवर्ती ने कहा, "यह पाया गया कि कार्बन फुटप्रिंट का कंपनियों के आकार और राजस्व के साथ सकारात्मक संबंध था। हालांकि, खर्चों के साथ सहसंबंध राजस्व के मुकाबले थोड़ा कम पाया गया।’’

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