देश की खबरें | जांच अधिकारियों को हर महीने एक मामला सौंपा जाएगा : नवी मुंबई के पुलिस अधिकारी

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मुंबई, दो जुलाई नवी मुंबई के पुलिस आयुक्त मिलिंद भारम्बे ने कहा है कि गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने के लिए एक जांच अधिकारी को महीने में केवल एक बड़ा मामला सौंपा जाएगा। उन्होंने कहा कि उनका बल नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए तैयार है।

भारम्बे ने सोमवार को महाराष्ट्र के नवी मुंबई में संवाददाताओं को बताया कि नवी मुंबई पुलिस को मामलों में जांच की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के तहत ई-शिकायत दर्ज करने की सुविधा मिलने से मामलों में वृद्धि होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, "नवी मुंबई के प्रत्येक पुलिस थाने में जांच अधिकारियों की संख्या 50-60 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है, क्योंकि प्रत्येक पुलिस थाना स्तर पर कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है और जांच की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए एक जांच अधिकारी को महीने में केवल एक बड़ा मामला दिया जाएगा।"

देश में सोमवार को तीन नए आपराधिक कानून लागू हो गए, जिससे भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में दूरगामी बदलाव आएंगे।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 पूरे देश में प्रभावी हो गए हैं। इन तीनों कानून ने ब्रिटिश कालीन कानूनों क्रमश: भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।

अधिकारी ने बताया कि नए आपराधिक कानून लागू होने के मद्देनजर नवी मुंबई पुलिस ने विभिन्न मामलों की जांच की गुणवत्ता और पेशेवर रुख बनाए रखने के लिए अपने कर्मियों को प्रशिक्षण दिया है।

उन्होंने कहा, "नए आपराधिक कानूनों के तहत ई-शिकायत दर्ज करने की सुविधा है जिसके कारण मामलों में वृद्धि होगी। इसलिए ऐसी संभावना है कि जांच अधिकारियों पर दबाव पड़ेगा जिसके कारण मामले दबा दिए जाएंगे, उन्हें अनदेखा किया जाएगा या लंबित रखा जाएगा और अधिकारी उचित न्याय नहीं कर पाएंगे।"

अधिकारी ने बताया कि किसी भी गुणवत्तापूर्ण जांच के लिए जांच अधिकारियों को समय की आवश्यकता होती है।

उन्होंने कहा कि स्थिति को ध्यान में रखते हुए नवी मुंबई पुलिस ने जांच अधिकारियों को समान रूप से कार्यभार सौंपने की प्रणाली लागू की है।

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