देश की खबरें | सरकारी एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी का अदान-प्रदान आवश्यक : एनएसएबी प्रमुख

गांधीनगर, पांच जून राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष आलोक जोशी ने बृहस्पतिवार को बेहतर परिणामों के लिए सरकारी एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एजेंसियों के सामने एक चुनौती यह है कि वे जिस परिपाटी से काम करती हैं उनसे उन्हें बाहर आना होगा।

जोशी गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय में ‘पुलिस प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन 2025’ में शामिल हुए प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। वह एनएसएबी का नेतृत्व करने से पहले, देश की खुफिया व्यवस्था में शीर्ष स्तर की एजेंसियों ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (रॉ) और राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) के प्रमुख थे।

जोशी ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘भारत एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां प्रौद्योगिकी कानून प्रवर्तन में क्रांति ला सकती है। हालांकि, इस क्रांति की सफलता आंकड़े एकत्र करने और उनका विश्लेषण करने, एजेंसियों के भीतर और सभी एजेंसियों के बीच इसे तेजी से साझा करने और फीडबैक के माध्यम से प्रणालियों को पुनः व्यवस्थित करने पर निर्भर करती है, साथ ही हमारे प्रयासों के केंद्र में मानवीय पहलू को रखना भी आवश्यक है।’’

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी जोशी ने कहा, ‘‘भारत के सामने एक चुनौती यह है कि ‘जानने की जरूरत’ के सिद्धांत पर समझौता किए बिना परिपाटी को तोड़ा जाए। मुझे लगता है कि यह ऐसी चीज है जो हमारी प्रणाली के लिए केंद्रीय है और यह खत्म नहीं होगी।’’

जोशी ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब वह रॉ के प्रमुख थे, तब एनटीआरओ ने खुफिया जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं रॉ का नेतृत्व कर रहा था, तो हमने विरोधी देश में एक ऑपरेशन किया और यह ऑपरेशन सफल रहा, और हमें पता था कि हमें किस तरह की चुनौतियों का सामना करना होगा। सुरक्षा स्तर बढ़ा दिया गया था और सावधानियां बरती गई थीं।’’

जोशी ने कहा कि उस समय एनटीआरओ ने रॉ को जानकारी दी थी, जिससे संकेत मिला था कि ‘कुछ चल रहा है’।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए मैंने एनटीआरओ के तत्कालीन अध्यक्ष से संपर्क किया और उनसे उस सूचना का अंश दिखाने का अनुरोध किया जिसके आधार पर जानकारी दी गई थी। दुर्भाग्य से, उनकी राय अलग थी। यह राय बनी कि कुछ सुरक्षा कारणों से वह उक्त सामग्री नहीं दिखा सकते। यह उनका आकलन था।’’

जोशी ने कहा, ‘‘लेकिन यह बात मेरे दिमाग में अटक गई। तीन महीने के भीतर, मैं एनटीआरओ में (प्रमुख के रूप में) था। वहां जाने के बाद, सबसे पहला काम जो मैंने किया, वह था उस फाइल को मंगवाना। और मेरा विश्वास करें, अगर उस संदेश की सामग्री मुझे दिखाई गई होती, तो कहानी कुछ और होती। आखिरकार, हम दोनों ही सुरक्षा संगठनों का नेतृत्व कर रहे थे।’’

एनएसएबी प्रमुख ने खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण और क्रियान्वयन समान रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि जो सूचना वे प्राप्त कर रहे हैं, उसका कोई न कोई उपभोक्ता भी है।

जोशी ने कहा, ‘‘आप उपभोक्ता से इस जानकारी के साथ क्या करने की अपेक्षा करेंगे? मेरा मानना ​​है कि यह ऐसी चीज है जिसे प्रणाली में समाहित किया जाना चाहिए, जानकारी एकत्र करते समय और प्रसारित करते समय।’’

उन्होंने कहा कि कोई भी खुफिया जानकारी फीडबैक के बिना पूरी नहीं होती, लेकिन अन्य एजेंसियों के साथ साझा की गई जानकारी पर फीडबैक प्राप्त करना भी उतना ही कठिन है।

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